Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही और प्रणालीगत विफलता का मामला मानते हुए पुलिस को बिना देरी के एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी की एकलपीठ ने दीपक हेंब्रम की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें थाने में एफआईआर के लिए आवेदन देने और थाना इंचार्ज को इस पर ‘तत्काल’ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि दर्ज एफआईआर की प्रति याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराई जाए और उसे प्रतिवाद शपथ पत्र के साथ अदालत में प्रस्तुत किया जाए।

याचिका में चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में कथित चिकित्सकीय लापरवाही और गंभीर अनियमितताओं को लेकर एफआईआर दर्ज करने तथा न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की गई थी। याचिका के अनुसार वर्ष 2025 में थैलेसीमिया से पीड़ित पांच नाबालिग बच्चों को अस्पताल में रक्त चढ़ाया गया, जिसके बाद वे एचआईवी संक्रमित हो गए।
पीड़ित बच्चों की उम्र पांच से सात वर्ष के बीच बताई गई है और वे सभी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। घटना के बाद से बच्चे और उनके परिवार गंभीर स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
राज्य सरकार की ओर से प्रत्येक बच्चे को दो लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की गई थी, लेकिन याचिका में इसे अपर्याप्त बताते हुए कहा गया कि एचआईवी जैसी गंभीर बीमारी के लिए आजीवन इलाज की आवश्यकता होगी, जिसका खर्च कहीं अधिक है।
(IANS)



