
Mahgama Assembly Election: झारखंड के हॉट सीटों में शुमार महगामा सीट पर कौन बाजी मारेगा इस कयास के बाजार गर्म होने शुरू हो गए हैं। कांटे की टक्कर कांग्रेस की तेज तर्रार महिला विधायक सह हेमंत कैबिनेट की निवर्तमान मंत्री दीपिका पाण्डेय और क्षेत्र व राजनीति में पकड़ रखने वाले भाजपा से तीन बार के विधायक रह चुके अशोक भगत के बीच होने जा रहा है।

दीपिका पांडेय सिंह का राजनीति सफर

निवर्तमान महगामा विधायक सह मंत्री दीपिका पाण्डेय सिंह ने राजनितिक सफ़र NSUI के राष्ट्रीय नेतृत्व से किया था। वर्ष 2014 में दीपिका ने राष्ट्रीय नेतृत्व के अलावे अपने ससुराल महागामा विधानसभा में एंट्री मारी और फिर उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। हालांकि 2014 में उन्होंने प्रयास टिकट लेने का किया था मगर 2009 में कांग्रेस सीट पर कांग्रेस के राजेश रंजन जीते हुए विधायक होने की वजह से इन्हें टिकट नहीं मिला। और राजेश रंजन वर्ष 2014 में तीसरे नंबर पर रहे थे। मगर दीपिका लगातार महागामा विधानसभा क्षेत्र में सक्रीय रूप से मेहनत करती रही जिसका नतीजा 2019 में जनता ने इन्हें महागामा सीट पर साढ़े 12 हजार वोट से जीताया। सरकार के आखिरी कार्यकाल में उन्हें मंत्री पद से भी नवाजा गया। हालांकि बतौर मंत्री उन्हें ज्यादा समय नहीं मिला और राज्य में चुनाव की घोषणा हो गई।
पिछले चुनाव में ये हुआ था
2019 के चुनाव से पहले अशोक भगत महगामा से तीन बार विधायक चुने जा चुके थे। 2005 के बाद 2014 में जीत हासिल करने के बाद उन्हें कांग्रेस की दीपिका पांडेय सिंह 2019 में करीब 12000 वोटों से हराया। इस जीत के बाद राजनीति की बिसात पर दीपिका ने सधी हुई चाल चली और राज्य भर में उन्हें शोहरत मिलने लगी। कांग्रेस की राजनीतिक समीकरण की वजह से मंत्री भी बनाया गया। लेकिन इस बार महगामा की जनता क्या करती है, यह देखने वाली बात होगी। क्योंकि कांटे की लड़ाई है। चुनौती बड़ी है। उनका सामना बीजेपी के कद्दावर नेता और तीन बार के विधायक रहे अशोक भगत से है। अशोक भगत की क्षेत्र और राजनीति में पकड़ किसी से छिपी नहीं है।
ऐसा रहा है महागामा विधानसभा सीट का इतिहास
वर्ष 2000 में संयुक्त बिहार से काटकर झारखंड अलग राज्य बना .अलग राज्य बनने से पूर्व ही बिहार विधानसभा के चुनाव संपन्न हो चुके थे। जब झारखण्ड अलग हुआ तो उस वक्त भाजपा के अशोक भगत ने राजद को हराकर यहाँ जीत का परचम लहराया था। कांग्रेस से अवध बिहारी सिंह (दीपिका पाण्डेय के ससुर) वे तीसरे स्थान पर रहे थे। 2000 में भाजपा को 32025 वोट तो राजद को 21519 तो कांग्रेस को महज 12622 वोट मिले थे। वर्ष 2005 में भी भाजपा को 46253 तो राजद को 39825 वोट मिले थे। लेकिन 2009 में कांग्रेस के राजेश रंजन ने भाजपा के अशोक कुमार को महज 8186 मतों से हराकर भाजपा से सीट छिनी थी। मगर 2014 के मोदी लहर में एक बार फिर भाजपा की टिकट पर अशोक भगत (70635)ने झाविमो के शाहिद इकबाल (39075) को भारी मतों के अंतर से हराया जबकि कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही थी। मगर 2014 में मिली हार के बाद दीपिका पाण्डेय ने गोड्डा में लगातार कांग्रेस के गिरते वजूद को दोबारा संवारने के काम किया और क्षेत्र में सक्रियता से लगी रही। 2019 में दीपिका की मेहनत रंग लायी और जनता ने उन्हें सर आँखों पर बैठाया 12500 मतों के अंतर से जीताया।
जानें वोटों का जातीय समीकरण
महगामा विधानसभा में सबसे बड़ा वोट बैंक मुस्लिम समुदाय का है। कुल वोट बैंक का करीब 35 फीसदी वोटर महगामा विधानसभा में मुस्लिम है। बताया जाता है कि इस विधानसभा में मुस्लिम 101057 मुस्लिम वोटर हैं। मुस्लिम वोटरों के बाद यादवों का वोट बैंक दूसरे नंबर पर है। करीब आठ फीसदी वोटर यहां यादव समाज से हैं। उनकी संख्या करीब 21994 है। शाह-18130, मंडस-15759, सिंह-11591. इसके बाद दूसरे वोटरों की संख्या है।
कुल मिलकर ये कहा जा सकता है तो मुस्लिम वोटर का एक मुस्त जिसे वोट मिल जाए। उनकी बल्ले बल्ले हो सकती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि किन मतदाताओं को अपने पक्ष में रिझाने में कामयाब हो पाते हैं।


