
Dumka: दुमका रेलवे स्टेशन पर आज अजीबोगरीब स्थिति देखने को मिली। जब रसिकपुर और आसपास के लोग स्थानीय दुमका सांसद सुनील सोरेन के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए,वहीं गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे के जमकर जयकारे लगाए। जबकि दोनों भाजपा के ही सांसद हैं। दरअसल, मौका था दुमका से बिहार की राजधानी पटना के लिए शुरू हुई ट्रेन को हरी झंडी दिखाने का।

बुधवार को जैसे ही ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के लिए दुमका सांसद सुनील सोरेन, गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे और दुमका विधायक बसंत सोरेन स्टेशन पहुंचे। तभी सांसद सुनील सोरेन को अपने घर में ही स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा।

दरअसल, 2 वर्ष पूर्व दुमका रेलवे स्टेशन परिसर से कोयला डंपिंग यार्ड की शुरुआत की गई है। शुरू होने के पूर्व से ही रसिकपुर और आसपास के लोग इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। इसके बावजूद कोयला डंपिंग यार्ड चालू हो गया। पाकुड से सड़क मार्ग से कोयला दुमका लाया जाता है जहां से गुड्स ट्रेन के माध्यम से देश के अन्य हिस्सों में भेजा जाता है। लेकिन कोल डंपिंग यार्ड शुरू होने से स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गई है।
क्या है मामला
रसिकपुर और आसपास के लोगों का कहना है कि जब से कोल डंपिंग यार्ड शुरू हुआ है तब से स्टेशन परिसर से लेकर आस पास के घरों तक कोयला का राख पहुंच रहा है। वातावरण प्रदूषित हो रहा है। लोगों को परेशानी हो रही है। इस समस्या के समाधान के लिए स्थानीय लोगों द्वारा चरणबद्ध आंदोलन किया जा रहा है। इसे हटाने को लेकर जगह-जगह आरजू मिन्नतें की गई। आवेदन दिया गया। बावजूद आज तक कोयला डंपिंग यार्ड दुमका स्टेशन से नहीं हट पाया। इन लोगों की बस एक ही मांग है कि कोल डंपिंग यार्ड को यहां से स्थानांतरित किया जाए। प्रदर्शनकरियों का कहना है कि कई बार इसको लेकर सांसद सुनील सोरेन से भी गुहार लगाई गई लेकिन समाधान नहीं हुआ है।
स्थिति बिगड़ता देख मंच से अपने संबोधन में गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने दुमका वासियों को भरोशा दिलाया की कोल डंपिंग यार्ड को सघन अधिवास से दूर स्थानांतरित करने के लिए वह हर संभव प्रयास करेंगे। इसके लिए उन्होंने 6 महीने से 1 साल का समय लिया है। अपने संबोधन में दुमका सांसद सुनील सोरेन ने भी वही बात दोहराई। कहा कि इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिया कि आने वाले समय में समस्या का समाधान हो जाएगा।


