
Ramgarh (Jharkhand) By-Poll Result: रामगढ़ विधानसभा उपचुनाव के प्रचार के दौरान चुनावी मंच से कई अनोखे भाषण भी सुनने को मिले थे। उसने सबसे चर्चित भाषण कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर का था। 24 फरवरी को रामगढ़ में मुख्यमंत्री की चुनावी जनसभा थी। उस दौरान फुटबॉल ग्राउंड में लोगों को संबोधित करते हुए राजेश ठाकुर ने कहा था कि “यह रामगढ़ है और मैं ठाकुर, अब जनता इस बात को देख ले की जाना किधर है”।

उन्होंने शोले फिल्म के आधार पर रामगढ़ और ठाकुर को एक साथ जोड़ कर एक नया नजरिया पेश किया था। लेकिन इनके विपक्ष में जय और वीरू की जोड़ी चुनावी मैदान में थी। आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो और चंद्र प्रकाश चौधरी घर-घर जाकर लोगों को वोट देने के लिए मना रहे थे।

यहां तक कि वे हर घर की समस्या समझने के लिए चूल्हा प्रमुख बनाते चल रहे थे। जय वीरू ने जो इस चुनाव में एक्सपेरिमेंट किया उसके आगे ठाकुर के भाषण को कोई स्थान नहीं मिला। गोला, दुलमी और चितरपुर में भी राजेश ठाकुर में इमोशनल कार्ड खेला। लेकिन हर जगह उनके तीर को जय वीरू की जोड़ी ने धराशाई कर दिया।
यूपी बिहार वालों के पेट में दर्द की नहीं मिली दवा
उपचुनाव को जीतने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी स्थानीय नीति को अपना हथियार बनाया था। उन्होंने कहा था कि 1932 के खतियान पर आधारित स्थानीय नीति बनाई गई थी। इसके आधार पर नियोजन नीति भी तैयार की गई थी। लेकिन यूपी और बिहार वालों के पेट में दर्द हो गया। उन लोगों ने हाईकोर्ट में चुनौती देकर झारखंड की नियोजन नीति को निरस्त करा दिया। मुख्यमंत्री ने यह बात बोल कर यूपीए प्रत्याशी को जिताने की दवा ढूंढने की कोशिश की थी। चुनाव में यूपीए उम्मीदवार की हार से लगता है कि पेट दर्द की दवा नहीं मिल पाई।
ममता के लाल पर भी जनता नहीं हुई निढाल
कांग्रेस उम्मीदवार बजरंग महतो इस चुनाव में उम्मीदवार इसलिए बने थे क्योंकि इससे पहले उनकी पत्नी ममता देवी यहां विधायक थी। आईपीएल गोलीकांड में 5 साल की सजा होने के बाद रामगढ़ में चुनाव हो रहा था। जेल में बंद ममता देवी अपने पीछे एक 6 महीने के बच्चे को छोड़ कर गई थी। चुनावी मंच पर ममता के इस लाल को भी लाया गया। झामुमो और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने उसे अपने गोद में लेकर जनता से वोट की अपील भी की। हर जगह ममता के लाल का हवाला दिया गया। लेकिन जब रिजल्ट आया तो पता चला कि जनता उस ममता के लाल पर भी निढाल नहीं हुई।


