
बांदा

प्रदेश की मंडियों में स्थित गेहूं क्रय केंद्रों में अगर मंदिर मठ या ट्रस्ट की जमीन में फसल पैदा हुई है और उस फसल को कोई गेहूं क्रय केंद्र में बेचने की कोशिश करता है, तो उसे उस भगवान का आधार कार्ड लिंक करना पड़ेगा। जिस भगवान के नाम वह जमीन है, बिना आधार के सरकारी केंद्र में फसल नहीं क्रय की जाएगी।

यह मामला तब पेचीदा नजर आया, जब अतर्रा तहसील के गिरवां थाना क्षेत्र में स्थित खुरहण्ड गांव में रहने वाले एक पुजारी रामचंद्र महाराज मंडी में फसल बेचने के लिए पहुंचे। अधिकारियों ने उनकी फसल को लेने से मना कर दिया और बताया कि इस संबंध में एसडीएम अतर्रा सौरभ कुमार शुक्ला द्वारा निर्देश दिए गए हैं कि बिना आधार कार्ड के किसी भी व्यक्ति की फसल नहीं खरीदी जाएगी। मंदिर के पुजारी को अधिकारियों की बात नागवार लगी इसलिए वह स्वयं एसडीएम के कार्यालय पहुंच गए और अपनी शिकायत बताई। इस पर एसडीएम ने स्पष्ट करते हुए कहा कि भगवान हो या इंसान अगर फसल बेचनी है तो आधार कार्ड लाना जरूरी होगा।
शासन की क्रय नीति बनी बाधक
एसडीएम सौरभ शुक्ला से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जो शासन की क्रय नीति जारी की गई है उसके मुताबिक फसल बेचने वाले का आधार कार्ड लिंक करना पड़ेगा और जो फसल क्रय की जाएगी उसकी कीमत उसके खाते में भेजी जाएगी, जिसके नाम आधार कार्ड होगा। जब उनसे कहा गया कि मंदिर और मठ की जमीनों का संचालन महंत या पुजारी द्वारा किया जाता है जिससे उनके निजी आधार के अनुसार ही फसल क्रय की जा सकती है। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की क्रय नीति में इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि यह तकनीकी खामी वास्तव में मंदिर, मठ के लिए सही नहीं है। इसके लिए शासन को लिखा पढ़ी की गई है कि मंदिर या मठों में लगी जमीनों की फसल खरीदने के लिए अलग से गाइडलाइन बनाई जाए। फिलहाल महंत या पुजारी मंदिर या मठों में पैदा हुई फसल प्राइवेट सेक्टर में दे सकते हैं।
आधार कार्ड नहीं बना तो मंदिर के खेतों में हुई फसल कैसे बेच पाएंगे पुजारी
बांदा जनपद में लगभग आधा सैकड़ा मंदिर है और मठ है जैसे श्री राधा कृष्ण मंदिर, हनुमान मंदिर, रामसीता मंदिर व अन्य देवियों के मंदिर हैं जो कि ग्रामीण क्षेत्रों में बने हुए हैं। इन मंदिरों में पूजा-पाठ करने वाले साधु-संत, पुजारी उस जमीन में खेती-बाड़ी करके अपने लिए खाने को अनाज पैदा करते हैं और जो बची हुई फसल होती है उसको मंडी में सही दामों पर बेचकर उस पैसे से मंदिर का विकास और अन्य कार्य करते हैं। राम जानकी मंदिर के पुजारी महंत राम कुमार दास ने कहा है कि अगर भगवान का आधार कार्ड नहीं बना तो मंदिर के खेतों में हुई फसल को हम लोग नहीं बेच पाएंगे। ऐसे में मठ मंदिर कैसे चल पाएंगे।
वही इस बारे में सीए विजय गुप्ता का कहना है कि जब कोई मठ या मंदिर का ट्रस्ट बनाया जाता है तो उसका संचालन कोई व्यक्ति करता है न कि भगवान, इसलिए जो मंदिर मठ या ट्रस्ट का संचालन करता है उसके ही आधार पर उनकी फसल क्रय की जानी चाहिए।


