
New Delhi: शायद ही ऐसा कोई सांसद इतना प्रयास अपने क्षेत्र के विकास के लिए करता हो। जितना सांसद निशिकांत दुबे ने किया है। ये बातें भरी सदन में पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन राज्य मंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियान ने कही। मंत्री बालियान चतरा सांसद सुनील कुमार सिंह के सवाल का जवाब दे रहे थे।

दरअसल, चतरा से बीजेपी सांसद सुनील कुमार सिंह ने अपने सवाल में पूछा कि देश में दूध के उत्पादन में हुए बढ़ोतरी के बावजूद झारखंड जैसे राज्यों में दूध की कमी है। डेयरी विकास की विभिन्न योजनाएं केंद्र सरकार चला रही हैं। लेकिन झारखंड में डेयरी विकास को लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया है। जैसे गोड्डा के ठाकुरगंगटी में तीन करोड़ रूपये दिए गए लेकिन तीन साल हो गए। उसी तरह चतरा के दो क्षेत्रों इटखोरी और हंटरगंज में डेयरी इकाई खुलना था। लेकिन अबतक कुछ नहीं हुआ बल्कि वहां मौजूद मेधा डेयरी किसानों को भी सही से पैसा नहीं देती है। ऐसे में इन क्षेत्रों में डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार की क्या योजना है।

सांसद सुनील सिंह के सवाल का जवाब देते हुए राज्य मंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियान ने ये साफ़ कर दिया कि झारखंड की प्रदेश सरकार ही इस क्षेत्र में कार्य नहीं कर रही है। उन्होंने अपने जवाब में कहा कि झारखंड में कोऑपरेटिव बीमार था। अब इसकी जिम्मेदारी एनबीडीबी (National Dairy Development Board) को सौंपी गयी है। एनबीडीबी प्रयास कर रही है कि यहां कुछ बेहतर हो। तीन नए प्लांट अभी-अभी बने हैं। साहेबगंज, पलामू और देवघर में।
राज्य मंत्री ने कहा कि रही बात गोड्डा की समस्या कि तो निशिकांत दुबे जैसा शायद ही कोई सांसद हो जो अपने क्षेत्र के विकास के लिए इतना प्रयास करता है। उन्होंने बताया कि एमपी निशिकांत दुबे के कहने पर एनबीडीबी के सदस्यों को उन्होंने बुलाया था ताकि समस्या को दूर किया जा सके। लेकिन जब प्रदेश ही काम नहीं कर रहा तो एनबीडीबी को उस जिले के लिए डायरेक्ट फंड की मांग करने को कहा गया है।
वहीं, सदन में हुए इस सवाल-जवाब का वीडियो शेयर करते हुए गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने लिखा है “मेरे झारखंड प्रदेश में सत्ताधारी कामचोर है, वे काम काम चोरी अधिक करते हैं। राज्य सरकार के कार्यकाल में एक योजना जमीन पर नहीं आ रहा है। “


