
Deoghar: देवघर के त्रिदेव हॉस्पिटल और ट्रामा सेंटर में किसी मरीज़ को पैसों की खातिर बंधक रखे जाने की खबरों को यहाँ के MD डॉ राकेश ने पूरी तरह तथ्य से परे और भ्रामक करार दिया है. उनका स्पष्ट कहना है की जब कोई भी निजी हॉस्पिटल में इलाज के लिए आता है तो जाहिर सी बात है की उसे आनेवाले खर्च को उठाना ही पड़ता है.
क्या है पूरा मामला

दरअसल 20 नवम्बर की मध्य रात्रि को राजेंद्र यादव नाम के मरीज़ को त्रिदेव हॉस्पिटल में भर्ती के लिए लाया गया. जबकि राजेंद्र यादव सरकारी सदर अस्पताल में पहले भर्ती था. जिसकी स्थिति ख़राब होने के बाद आनन-फानन में यहाँ लाया गया.

देर रात की डॉ राकेश उसे देखने पहुंचे। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्होंने तय किया की मरीज़ को वेंटिलेटर पर रखना होगा। इस दौरान आनेवाले तमाम खर्चो के बारे में परिजन को बता दिया गया था. जिस पर परिजनों ने अपनी सहमति दी तब जा कर इलाज शुरू किया गया.
मरीज़ वेंटिलेटर से हटने के बाद आईसीयू में रखा गया और उसके बाद उसकी स्थिति काफी सुधर गयी और इलाज के दौरान आये बिल के भुगतान के बाद मरीज़ को जाने के लिए कह दिया गया.
मामले ने यू टर्न लिया
डॉ राकेश कहते है की जब हॉस्पिटल के बिल का भुगतान करने को कहा गया तब उनके परिजनों ने इसमें असमर्थता जाहिर करने लगे. निवेदन के बाद अस्पताल प्रबंधन ने बिल में हर संभव रिआयत पर भी सहमति दे दी.
लेकिन यही से बात दूसरी और मुड़ती है और इंट्री होती है मुखिया की फिर सामाजिक कार्यकर्ताओं की. सब आते है बात कर सच को समझ चले गये लेकिन मदद को कोई आगे नहीं आता है. फिर बात स्थानीय पुलिस प्रशासन तक भी पंहुचा दी गयी. सभी पहुंचे और अस्पताल प्रबंधन की बात से सहमत हो चले गए.
आखिर कार थक हार कर डॉ राकेश ने मरीज को बिना पैसा लिए खाने का भी पैसा देते हुए मरीज़ को घर जाने दिया।


