
Ranchi: कार्मिक प्रशासनिक सुधार राजभाषा विभाग (Personnel Administrative Reforms Department of Official Language) ने झारखंड के भोगता समुदाय का जाति प्रमाण पत्र अनुसूचित जनजाति से निर्गत करने का निर्देश दिया है। इस संबंध में सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, सभी विभागध्यक्ष, प्रमंडलीय आयुक्त व उपायुक्त झारखंड को पत्र लिखा गया है। कार्मिक विभाग ने संविधान (Scheduled Castes and Scheduled Tribes) आदेश संशोधन अधिनियम 2022 के अनुरूप यह कार्यवाही करने का निर्देश दिया है। इस संशोधन के तहत भारत सरकार ने भोगता समुदाय को अनुसूचित जाति से हटाकर अनुसूचित जनजातियों की सूची में डाल दिया दिया है। केंद्र के इस फैसले के अनुरूप झारखंड ने इसे लागू करते हुए संशोधन के अनुरूप ही ऑनलाइन, ऑफलाइन जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने की कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

भोगता समुदाय को अब तक एसटी के तहत मिलने वाली जो विशेष योजनाओं का लाभ नहीं मिलता था, उससे वह लाभान्वित हो सकेंगे। एसटी में शामिल होने के बाद इन जातियों के सामाजिक स्थिति में भी बदलाव आने की संभावना जताई जा रही है।

भोगता समुदाय के अलावा तमरिया/तमड़िया, पुरान, देशवारी, गंझू, दौलतबन्दी (द्वालबंदी), पटबंदी, राउत, मझिया, खैरी (खेरी) भी एसटी की सूची में शामिल होंगे। इन समुदाय का भी जाति प्रमण पत्र एसटी सूची से निर्गत होगा। अनुसूचित जाति से 10%, अनुसूचित जनजाति से 26% आरक्षण मिलता है। भोगता सहित अन्य जातियों के अनुसूचित जाति से अनुसूचित जनजाति में आने से बड़े आरक्षण के दायरे में शामिल होने का लाभ मिलेगा।
राज्य में अभी एससी के लिए 10% और एसटी के लिए 26% आरक्षण है। इस कारण अतिरिक्त आरक्षण से लाभान्वित हो सकेंगे। हालांकि एसटी की सूची में अधिक जातियां और जनसंख्या है। आरक्षण के साथ-साथ एससी की तुलना में एसटी के लिए अधिक कल्याणकारी और विकास की योजनाएं राज्य और केंद्र सरकार चलाती हैं।
आजादी के बाद 10 अगस्त 1950 में भोगता समुदाय को अलग जाति बनाकर झारखंड की प्रदेश अनुसूचित जाति श्रेणी में क्रम संख्या तीन में सूचीबद्ध किया गया है। इस कारण भोगता समुदाय 72 वर्षों से अपने अस्तित्व की मूल पहचान से वंचित है। ऐसा होने से भोक्ता समाज की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक स्थिति अभी दयनीय है। भोगता खरवार जनजाति की उप जाति हैं। हालांकि वह अभी अनुसूचित जाति की श्रेणी में हैं।



