
रामगढ़

जिले में कोरोना के नाम पर मरीजों को लूटना साईं हेल्थ केयर अस्पताल को महंगा पड़ा है। रामगढ़ डीसी संदीप सिंह के निर्देश पर बनी जांच टीम ने अस्पताल का लाईसेंस रद्द करने की अनुशंसा कर दी है। मंगलवार को जांच टीम में शामिल अधिकारियों ने कहा कि साईं हेल्थ केयर अस्पताल में कोविड-19 प्रोटोकॉल का घोर उल्लंघन किया गया है। साथ ही उस अस्पताल प्रबंधन ने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का भी उल्लंघन किया है। उस अस्पताल में इस बात की भी पुष्टि हुई है कि कोरोना मरीजों से उसने मोटी रकम लूटी है।

एसडीओ कीर्ति श्री ने कहा कि डीसी के निर्देश पर उन्होंने एक दंडाधिकारी को जांच टीम में शामिल किया था। पीडब्ल्यूडी के कार्यपालक अभियंता राजेश मुर्मू के द्वारा भी साईं हेल्थ केयर अस्पताल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की अनुशंसा कर दी गई है। इस मामले में सिविल सर्जन को ही कार्रवाई करनी है। इसलिए अनुशंसा की कॉपी उन्हें भी भेजी गई है। साथ ही डीसी कार्यालय को भी पूरी रिपोर्ट भेजी गई है।
लोगों को नहीं पता, कार्रवाई के नाम पर हुआ क्या
अस्पताल द्वारा लूट मचाए जाने के बहुचर्चित मामले में अब तक क्या हुआ, इसके बारे में आम लोगों को नहीं पता। जिला प्रशासन ने विधि सम्मत कार्रवाई करने की बात तो कही थी। पर उस कड़ी में कौन सी कार्रवाई हुई यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। हालांकि 1.35 लाख रुपए लौटाने की बात सामने आई है।
कौन हैं डॉक्टर वीरमनी, इनके नाम पर चल रहा अस्पताल
साईं हेल्थ केयर अस्पताल का दूसरा सबसे बड़ा झोल भी सामने आया है। सूचना है कि जिस अस्पताल का देखभाल डॉ मिथलेश कुमार कर रहे है। उसकी जबावदेही डॉ वीरमनी कुमार का है। क्योंकि अस्पताल का निबंधन डॉ वीरमनी कुमार के नाम से होने की बात सामने आ रही है। अगर अस्पताल का निबंधन उनके नाम से है तो वे अब कहां है।
जबावदेही तय कर जिम्मेवार डॉ के नाम पर किया जाता नया रजिस्ट्रेसन
जब भी कोई अस्पताल का नया निबंधन होता है तो उसमें एक योग्य डॉ की भूमिका अहम होती है। नियमानुसार योग्य डॉ के ही नाम पर अस्पताल का निबंधन होता है। उसी वक्त जबावदेही तय किया जाता है अस्पताल उसी डॉ के देखरेख में चलेगा। जिसके नाम से निबंधन किया जा रहा है। अगर सारे नियम कानून सही है तो फिर वो डॉ कंहा है, जिनके नाम पर अस्पताल चल रहा है।



