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OMG! : पांच वर्ष पूर्व मर चुका युवक अचानक पहुंचा घरवालों के सामने, ग्रामीण हुए अचंभित

सरायकेला-खरसावां जिले (Seraikela-Kharsawan District) के राजनगर थाना क्षेत्र के चिंगुआ गांव में एक ऐसा वाक्या सामने आया, जिस पर आज के जमाने में किसी को विश्वास करना शायद मुश्किल हो।

Seraikela(Jharkhand): सरायकेला-खरसावां जिले (Seraikela-Kharsawan District) के राजनगर थाना क्षेत्र के चिंगुआ गांव में एक ऐसा वाक्या सामने आया, जिस पर आज के जमाने में किसी को विश्वास करना शायद मुश्किल हो। दरअसल गांव के जिस पंकज नामक युवक की विगत पांच साल पहले मौत हो गई थी। वह भटकते-भटकते ही सही, लेकिन जीते-जागते हालत में गांव और घरवालों के सामने आ पहुंचा। यह देख गांववालों को तो क्या, घरवालों तक को विश्वास हो गया कि उनका पंकज दोबारा जन्म लेकर उनकी आंखों के सामने आ गया है। वे बड़े लाड़-प्यार से उस युवक को अपने घर ले गए। उसे खाना खिलाया और घर में रखा।

पर सारा माजरा तब साफ हो गया जब उस युवक ने अपना मुंह खोला। तब गांववालों के साथ घरवालों को भी समझ में आ गया कि जिसे वह अपना पंकज मान रहे थे वह वास्तव में उसका हमशक्ल है, जो बिहार के सहरसा से भटकता हुआ उनके गांव, उनके सामने आ पहुंचा है। तब जाकर पूरे मामले का खुलासा हो गया।

विषधर के डंसने से हो गयी थी पंकज की मौत

चांगुआ के रहनेवाले पाकु महतो के बड़े बेटे पंकज की जहरीला सांप काटने से करीब पांच साल पूर्व मौत हो चुकी थी। अब उसके गांव और घरवालों को क्या पता कि उसी की तरह हूबहू दिखने वाला बिहार के सहरसा जिले का रहनेवाला प्रदीप एक दिन अचानक उनकी आंखों के सामने पहुंच जाएगा। लेकिन हुआ कुछ ऐसा ही। दो-तीन दिन पहले प्रदीप भटकते हुए चांगुआ गांव आ पहुंचा। बगैर खाना-पानी के उसकी हालत विक्षिप्त जैसी हो गयी थी। उसी समय गांव में एक भोज कार्यक्रम चल रहा था, जहां वह युवक खाना मांगने जा पहुंचा। वहां पंकज के घरवाले भी मौजूद थे। उनकी नजर जैसे ही उस युवक पर पड़ी तो उनके होश ही उड़ गए। ग्रामीण भी अचंभित थे कि आखिर पांच साल पहले मरा पंकज कैसे अचानक उनकी आंखों के सामने आ गया? इधर पंकज के घरवालों ने उसे देखते ही अपना बेटा मान लिया और घर ले जाकर खाना-पीना दिया, साथ में घर में रखा।

देखते ही देखते पूरे क्षेत्र में यह खबर जंगल की आग की तरह फैल गई कि पाकु महतो का बेटा दोबारा जिंदा होकर गांव आ गया है। हालत यह हो गई कि लोग दूर-दराज इलाके से उसे देखने पहुंचने लगे। चूंकि प्रदीप गांव वालों की भाषा नहीं बोल पा रहा था, इसलिए वह भी चुप्पी साधे हुए था। इससे असमंजस की स्थिति और बढ़ गई। यह स्थिति स्पष्ट तब हुई जब शुक्रवार की शाम ग्रामीणों और पंकज के परिवार के लोगों ने उससे हिंदी भाषा में बात करनी शुरू की। इस पर पंकज ने जब अपना मुंह खोला तो सारा माजरा साफ हो गया।

युवक ने बताया कि वह बिहार के सहरसा जिले का रहने वाला है जो काम की तलाश में करीब डेढ़ महीने पहले अपने घर से निकला था। वहां से भटकते-भटकते वह राजनगर पहुंच गया। उसे पिछले कई दिनों से खाना तक नसीब नहीं हुआ है, सिर्फ पानी पीकर अपना गुजारा कर रहा है। युवक की पूरी बात सुनने के बाद ग्रामीणों ने उसे सुरक्षित राजनगर पुलिस को सौंप दिया। उसने अपने मामा का मोबाइल नंबर भी पुलिस को दिया है। उसके बाद राजनगर पुलिस ने युवक के परिजनों से संपर्क साधा है। फिलहाल उसके परिजनों के यहां पहुंचते ही उसे उनके हाथों सौंप देने की बात कही जा रही है।

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