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झारखंड आंदोलनकारियों को पेंशन और आश्रितों के लिए सरकारी नौकरी में पांच प्रतिशत आरक्षण देगी सरकार: हेमंत सोरेन

मुख्यमंत्री (Chief Minister Hemant Soren) ने अपने समापन भाषण में घोषणा की कि सरकार सभी झारखंड आंदोलनकारियों को पेंशन और आश्रितों के लिए सरकारी नौकरी में पांच प्रतिशत आरक्षण देगी।

Ranchi: झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन बुधवार को मुख्यमंत्री (Chief Minister Hemant Soren) ने अपने समापन भाषण में घोषणा की कि सरकार सभी झारखंड आंदोलनकारियों को पेंशन और आश्रितों के लिए सरकारी नौकरी में पांच प्रतिशत आरक्षण देगी।

एक बार फिर उन्होंने जेपीएससी पीटी परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर हो रहे आंदोलन पर भाजपा नेताओं कटाक्ष किया। मुख्यमंत्री ने समापन संबोधन के मौके पर 53 मिनट के अपने भाषण में हर महत्वपूर्ण विषय का जिक्र किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार की नीतियों के कारण विभिन्न विभागों में कार्यरत अनुबंधित कर्मी धरना-प्रदर्शन कर रहे है, वे लोगों से अपील करते है कि सभी धैर्य रखें, उनकी समस्याओं का 200 फीसदी समाधान होगा, जिस समस्या के समाधान का संभव होगा, उसका समाधान होगा। इसी संकल्पशक्ति का यह प्रमाण है कि 65 से 70 हजार पारा शिक्षकों की समस्या का भी समाधान किया है, शिक्षामंत्री ने लगातार कई बैठकें की।

सोरेन ने कहा कि झारखंड में यूनिवर्सल पेंशन योजना की शुरुआत की गयी है, वृद्धजनों, दिव्यांगजनों और विधवा और परित्यगता महिलाओं को भी पेंशन दिया जाएगा। दिव्यांगजनों के लिए 29 दिसंबर के बाद स्पेशल ड्राइव चलाकर चिह्नितीकरण का काम शुरू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि साल 2014 से पहले यहां का माहौल क्या था, उससे सभी वाकिफ हैं। हिंदू-मुस्लिम और अगड़-पिछड़ा के नाम पर इस राज्य में खाई पैदा कर दिया गया था। लेकिन अब उनकी सरकार शांत वातावरण तैयार कर रही है इसी का नतीजा है कि मॉब लिंचिंग के खिलाफ विधेयक पारित हुआ है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि समाज के हर तबके की समस्याओं का समाधान होगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने पारा शिक्षकों की समस्याओं का समाधान निकाल लिया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां के खदानों से खनिज तो निकाला जाता है लेकिन उसे रिसीव नहीं किया जाता। आलम यह है कि अगर झरिया, धनबाद और रामगढ़ में मेडिकल कैंप लगाया जाए तो 90प्रतिशत से ज्यादा लोग टीवी की बीमारी से ग्रसित मिलेंगे।

सोरेन ने कहा कि सरकार आपके द्वार के जरिये हम वहां तक पहुंचे जहां पहले कभी सरकार नहीं पहुंची थी। राज्य में भाषा संस्कृति को जीवित रखने के लिए पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय विधेयक लाया गया ।

मुख्यमंत्री ने भाजपा विधायकों को चेतावनी देते हुए कहा कि ‘जो-जो सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में नही जाएगा वो दोबारा इस सदन में नहीं आएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल, जंगल, जमीन में राज्य के लोगों की आत्मा है। समय- समय पर जमीन अधिग्रहण के कानून बने लेकिन उन्हें प्रभावी नही बनाया गया। उन्होंने कहा कि ये सरकार सबको साथ लेकर चलना चाहती है। उन्होंने कहा कि मैं इसी माटी का रहने वाला हूं, पहले माटी का कर्ज अदा करने का फर्ज है।

पिछड़े वर्गों को अधिकार देने के लिए सरकार कटिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि लंबे समय तक विपक्ष के साथियों को वनवास काटना पड़ेगा।

कृषि विभाग में जेपीएससी का जो रिजल्ट आया है, किस कैटेगरी को जेपीएससी ने पूरा भर दिया है। अपना कोटा पूरा करने के बाद एसटी, एससी, ओबीसी अभ्यर्थियों ने जनरल कोटा में भी अपनी जगह बनाई। ये भाजपा को नहीं दिखता है। विपक्ष के नेता ऐसे मुद्दों पर हाथ डाल रहे हैं। जहां उनका ही जलना तय है। उन्होंने कहा कि जब दलित, ओबीसी, एसटी, एससी के बच्चे आगे बढ़ रहे हैं तो मनुवादी सोच वाले लोगों के पेट में दर्द उठ रहा है। इन्हें नहीं सुहाता कि एससी, एसटी, ओबीसी के बच्चे बीडीओ, सीओ, आईएएस, आईपीएस बने। मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि राज्य में जमीन लो उद्योग लगाओ और विस्थापितों को गोली मार दो। अब यह सब नहीं चलेगा। जमीन लेने के समय रैयत मां-बाप सभी हो जाते हैं। सरकार इन मामलों को गंभीरता से लिया और कार्रवाई शुरू कर दी है। ऐसे लोगों पर सरकार ने नकेल कसना भी शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी-अभी राज्य को दिशा देने का मौका मिला है। जमीन अधिग्रहण के कई कानून बने। उसका उल्लंघन भी हुआ। इसको भी ठीक करने के लिए राज्य में कानून हैं लेकिन इसे प्रभावी नहीं बनाया गया।

हमारी सरकार ने बड़कागांव में यह करके दिखाया है। यह काम जारी रहेगा। विस्थापितों की जमीन रैयतों को वापस की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र ने राशन को भी फिक्स कर दिया। हमारी सरकार ने सभी को समान रूप से लाने का काम किया । इस राज्य के आदिवासी में भीख मांगने की परंपरा नहीं है। यही वजह है कि खाद्य आपूर्ति विभाग अतिरिक्त 15 लाख लोगों को हरा कार्ड देकर मुफ्त राशन दे रही है। 73 लाख परिवार को मुफ्त राशन दिया जा रहा है। धोती, साड़ी और लुंगी योजना पूर्व में भी चलाया था। लेकिन पूर्व की पूंजीपति सरकार ने सभी को बंद कर दिया था। पांच साल तक हाथ में राशन कार्ड लेकर 24 से अधिक लोग मर गये।

कोरोना ने हमारी सरकार ने उस वक्त भी लोग को भूख से नहीं मरने दिया। सरकार आपके द्वार में विपक्ष ना जाये मैं लिखकर देता हूं, जो नहीं जायेगा वो इस सदन में वापस नहीं आयेगा।

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