New Delhi: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने 12वीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक से खालिस्तान से जुड़े अंशों को हटाने का निर्णय लिया है। एनसीईआरटी ने यह कदम शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की मांग पर उठाया है। दरअसल, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने एनसीआरईटी को एक पत्र लिखकर खालिस्तान से जुड़े अंश हटाने की मांग की थी।

12वीं कक्षा की राजनीतिक विज्ञान की पुस्तक ‘स्वतंत्र भारत में राजनीति’ के सातवें अध्याय ‘क्षेत्रीय आकाक्षाएं’ में खालिस्तान को लेकर ये अंश हैं। एनसीआरईटी ने अब इसे हटाने का निर्णय किया है। सिख संगठनों की दलील थी कि एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकों में ऐसे तथ्यों से सिखों की छवि खराब हो रही है। सिख संगठनों की इसी दलील के आधार पर एनसीआरईटी ने इन अंशों को हटाने का फैसला किया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूल एजुकेशन विभाग ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि एसजीपीसी ने इसे हटाने की मांग की थी। इसके बाद आधिकारिक तौर पर इसे हटा दिया गया है। मंत्रालय का कहना है कि एनसीईआरटी की 12वीं की पॉलीटिकल साइंस की किताब में खालिस्तान का जिक्र था।
शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी ने पिछले महीने एनसीआरईटी से यह मांग थी। गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी का कहना था कि 12वीं क्लास की किताब से खालिस्तान के जिक्र को हटाया जाए। इसके अलावा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने यह भी मांग रखी थी कि पाठ्य पुस्तकों से किताबों से वे तथ्य भी हटाए जाएं जिनमें सिखों को अलगाववादी बताया जा रहा है।
सिख संगठनों का कहना था कि पाठ्य पुस्तकों में गलत प्रकार से जानकारियां दी गई हैं। सिख संगठन को इन तथ्यों पर आपत्ति थी। यह भी कहा गया कि किताबों में ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।
पत्र में कहा गया था कि पुस्तक में आनंदपुर साहिब और खालिस्तान को लेकर जो जानकारी है, उस पर ही एसजीपीसी ने आपत्ति जताई है। इन्हीं गलत फैक्ट्स को किताबों से हटाने की मांग की गई है। पत्र में यह भी कहा गया है इस अध्याय में बताया गया है कि 1973 में आनंदपुर साहिब प्रस्ताव को शिरोमणि अकाली दल ने अपनाया। किताब में इस प्रस्ताव को ‘अलगाववादी प्रस्ताव’ बताया गया है। इसमें कहा गया है कि प्रस्ताव के जरिए क्षेत्रीय स्वायत्ता की मांग को उठाया गया है। सिख संगठन का यह भी कहना है कि प्रस्ताव में संघवाद को मजबूत करने की बात है। लेकिन हिंदी में पढ़ने पर ऐसा लगता है कि यहां अलग सिख राष्ट्र की मांग है।
इससे पहले पिछले वर्ष एनसीईआरटी ने इतिहास की किताबों में कुछ अंश को हटा दिया है। खासकर अपनी 12वीं कक्षा के पाठ्यपुस्तक से मुगलों और 11वीं कक्षा की किताब से उपनिवेशवाद से संबंधित कुछ अंश को हटाया गया था। इसके अलावा स्कूली पाठ्य पुस्तकों से जम्मू-कश्मीर के अनुच्छेद-370 को सुरक्षित रखने के अंश को भी हटाया गया है। एनसीईआरटी ने कक्षा 10 की पाठ्यपुस्तक व विज्ञान के सिलेबस से चार्ल्स डार्विन की ‘एवोल्यूशन थ्योरी’ का अध्याय हटाने का फैसला भी किया है।



