
नई दिल्ली : कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) निर्माता कंपनियां मॉडर्ना (Moderna) और फाइजर (Pfizer) ने दिल्ली सरकार को सीधे वैक्सीन की आपूर्ति करने से मना कर दिया है. इसको लेकर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है. जबकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने केंद्र से तत्काल मंजूरी देने को कहा है. इन दोनों कंपनियों से दिल्ली सरकार ने वैक्सीन की आपूर्ति के लिए बात की थी, कंपनी ने नियमों का हवाला देकर सीधे राज्यों को वैक्सीन देने से मना कर दिया.

कोरोना महामारी के बीच वैक्सीन की कमी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. दिल्ली में 18 साल के ऊपर के लोगों के लिए वैक्सीनेशन सेंटर को बंद करना पड़ा है. कोरोना की रोकथाम के लिए जरूरी वैक्सीन न मिलने पर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मोदी सरकार पर हमला बोला है. राजधानी में वैक्सीन की कमी के लिए उन्होंने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. मनीष सिसोदिया ने पूछा कि कोरोना वायरस गंभीर बीमारी है और केंद्र सरकार ने मजाक क्यों बना रखा है. उन्होंने कहा कि सवाल करने पर बीजेपी उटपटांग जवाब देने लगती है. केंद्र राज्यवार राजनीति से बाहर निकले.

मनीष सिसोदिया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दिल्ली में 18 से 44 वर्ष के लोगों के लिए सभी 400 टीकाकरण केंद्र वैक्सीन की कमी के कारण बंद हो गये हैं. वहीं, 45 साल से ऊपर के लोगों के लिए कोवैक्सीन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. जिसकी वजह से कई सेंटरों को बंद करना पड़ा है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अब भी सो रही है. केंद्र को नींद से जागना चाहिए और वैश्विक टीका निर्माताओं से बात कर देश में वैक्सीन मंगवानी चाहिए.
उन्होंने कहा कि वैक्सीन सबसे कारगर और अंतिम हथियार है. सारी दुनिया में वैक्सीन को लेकर पॉजिटिव माहौल है और बहुत द्दत से वहां की सरकारें वैक्सीन बनवाने, खरीदने में जुटी हुई है. दिल्ली सरकार ने भी अपने सभी नागरिकों को वैक्सीन लगवाने के लिए युद्धस्तर पर तैयारी शुरू की थी. इसके लिए दिल्ली में 400 सेंटर युवाओं के लिए बनाये गये. और 650 सेंटर 45 साल से ऊपर के लोगों के लिए बनाये गये.
सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार की बदइंतजामी ही वजह से युवाओं के सारे सेंटर बंद हो गये. कोवैक्सीन वाले 45 साल से ऊपर के लोगों के सेंटर भी बंद हुए. वैक्सीन की उपलब्धता के लिए पूरी तरह केंद्र सरकार जिम्मेदार है. आज देश जो कोरोना की मार झेल रहा है तो इसकी जिम्मेदार केंद्र सरकार है. केंद्र ने वैक्सीन की उपलब्धता पर कभी भी काम नहीं किया.
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्यों को वैक्सीन के लिए वैश्विक टेंडर निकालने को कहा. हमारी सरकार ने जब जॉनसन एंड जॉनसन, मॉडर्ना और फाइजर से बात की तो मॉडर्ना और फाइजर ने कहा कि वह केवल केंद्र सरकार से बात करेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी दुनिया ने इन कंपनियों को अपने यहां मंजूरी दे दी है और भारत सरकार ने इन कंपनियों को अपने यहां मंजूरी नहीं दी है.
विदेशी कंपनियों के वैक्सीन को जल्द मंजूरी दे केंद्र सरकार
सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार आखिर क्यों केवल देश में बनने वाली वैक्सीन को मंजूरी दी और इन वैक्सीनों को विदेश क्यों भेजा जा रहा है. उन्होंने कहा कि हम केवल मंजूरी-मंजूरी खेल रहे हैं, विदेशी वैक्सीनों को मंजूरी नहीं दे रहे हैं. दुनिया के कई बड़े देशों ने इन वैक्सीन को पिछले साल ही मंजूरी दे दी है, लेकिन हमारी केंद्र सरकार सो रही है.
उन्होंने कहा कि मैं हाथ जोड़कर केंद्र सरकार से कहता हूं कि आप वैक्सीनेशन कार्यक्रम को मजाक मत बनाइये. विदेशी कंपनी के वैक्सीन को मंजूरी दीजिए. ऐसा न हो कि जबतक हमारे देश में मंजूरी मिले और ये वैक्सीन आएं, तब तक काफी देर हो जाए. सिसोदिया ने कहा कि जबतक केंद्र सरकार विदेशी वैक्सीनों को मंजूरी नहीं देगी राज्य सरकारें भी उन्हें नहीं खरीद पायेंगी.
सिसोदिया ने कहा कि अमेरिका में दिसंबर 2020 में फाइजर मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉसन्स को मंजूरी दी गई थी, लेकिन भारत ने अब तक इन्हें मंजूरी नहीं दी है.
उन्होंने कहा कि दुनियाभर की सरकारें ये वैक्सीन खरीद भी चुकी हैं. आखिर क्यों हम देश की दो कंपनियों के भरोसे हैं और उनके वैक्सीन भी निर्यात कर रहे हैं. सिसोदिया ने कहा कि रूस ने अगस्त में स्पूतनिक को मंजूरी दी और दिसम्बर में वैक्सीनेशन शुरू कर दिया. लेकिन हमने 2020 में मना कर दिया था. अप्रैल 2021 में मंजूर दी, जबकि 68 देश यह खरीदकर लगा रहे हैं. ब्रिटेन ने दिसंबर में फाइजर को मंजूरी दी, हम तब भी सो रहे थे और अब भी सो रहे हैं, जबकि फाइजर अमेरिका में बनी है. अब तक 85 देश फाइजर को खरीद चुके हैं. मॉडर्ना को 46 देश मंजूरी दे चुके हैं और जॉनसन को 41 देश, ये क्या मजाक चल रहा है.
दिल्ली के डिप्टी सीएम सिसोदिया ने कहा कि दुनियाभर की सरकारों ने इंटरनेशनल प्रोडक्शन पर नजर रखी और वहां की सरकरो ने एडवांस में प्रोक्योरमेंट ऑर्डर किया. नवंबर 2020 तक अमेरिका ने एक एक व्यक्ति के लिए वैक्सीन खरीद ली थी. ब्रिटेन ने जनवरी में ही 65 फीसदी आबादी के लिए वैक्सीनेशन शुरू कर दिया था. नवंबर में मोदीजी ने सीरम इंस्टिट्यूट का दौरा किया था, लेकिन उसमें इन्वेस्ट भी नहीं किया, अब अप्रैल में यह शुरू किया है. उन्होंने कहा कि हाथ जोड़कर केंद्र से विनती करता हूं कि वैक्सीनेशन प्रोग्राम को मजाक न बनाएं, ऐसा न हो कि लेट हो जाएं और जिन्हें पहली डोज लगी है उनकी एंटीबॉडी भी खत्म हो जाए.


