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गैर-आदिवासी के उत्पीड़न के विरोध में शिलांग में भूख हड़ताल पर बैठे चौधरी दंपति

मेघालय (Meghalay) में गैर-आदिवासियों (Non- Tribal) पर लगातार शारीरिक एवं मानसिक अर्थमैटिक उत्पीड़न के विरोध में आज से शिलांग निवासी चौधरी दंपति शिलांग में आमरण भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।

Shillong: मेघालय (Meghalay) में गैर-आदिवासियों (Non- Tribal) पर लगातार शारीरिक एवं मानसिक अर्थमैटिक उत्पीड़न के विरोध में आज से शिलांग निवासी चौधरी दंपति शिलांग में आमरण भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती आज सुबह 10.30 बजे शिलांग की प्राण केंद्र खिनडाई लाडे (पुलिस बाजार) के पुराना विधानसभा के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने गैर आदिवासियों पर लगातार हो रहे अत्याचार का विरोध एवं इसे बंद करने के लिए सरकार से उचित कदम उठाने की मांग को लेकर कड़ाके की ठंड में खुले में आमरण भूख हड़ताल पर चौधरी दंपति बैठे हैं। शिलांग के रिलवोंग के रहने वाले सूशीतकांति चौधरी एवं उनकी पत्नी कल्पना चौधरी आमरण अनशन पर बैठकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

सूशीतकांति ने कहा है कि पहले भी बंगाली सहित गैर आदिवासियों पर लगातार उत्पीड़न की घटनाओं के बारे में उपयुक्त प्रमाण के साथ पत्र प्रेषित कर उसे रोकने के लिए पूर्व खासी पहाड़ के जिला उपायुक्त ईसाउयांदा लालू को उपयुक्त कार्यवाही करने की मांग की थी लेकिन उन्होंने इस पर कोई कदम नहीं उठाया।

सुशीतकांति ने कहा है कि वर्ष 1979 से 2022 तक राजधानी शिलांग सहित मेघालय के विभिन्न इलाकों के अनेक गैर आदिवासी लोगों अनेकों प्रकार के अत्याचार का सामना करना पड़ा है।

हैरान कर देने वाली बात यह है कि बीते 20 जनवरी को शिलांग की गाड़ीखाना इलाके के दो बंगाली युवकों को चाकू मारकर घायल कर दिया गया। इनमें से एक के पेट में स्क्रू ड्राइवर घुसा दिया गया। वे अब स्थानीय अस्पताल में चिकित्सारत हैं। इनमें से एक की हालत काफी खराब है। वे जीवन और मौत के बीच में झूल रहे हैं।

इतने संगीन कृत्य करने के बाद भी अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं, राज्य पुलिस उन्हें पकड़ने या गिरफ्तार नहीं कर रही है। ताज्जुब की बात यह है कि अपराधी को खुले आम घूमने का अवसर दिया जा रहा है।

चौधरी ने कहा है कि भारतीय नागरिक के रूप में वे इस प्रकार के अत्याचार के विरुद्ध विरोध करने के लिए आमरण भूख हड़ताल पर बैठने का निर्णय लिया है। स्थानीय खासी समाज व राज्य सरकार मेघालय के गैर आदिवासी समाज को तीसरी श्रेणी के नागरिक के रूप में जीने के लिए मजबूर किया जा रहा है। चौधरी ने कहा बीते करीब 42 साल से भी अधिक समय से बंगाली सहित गैर आदिवासी लोगों का शारीरिक एवं मानसिक, अर्थिक उत्पीड़न किया जा रहा है। बंगालियों को बांग्लादेशी कहकर बैनर लगाया जा रहा है एवं लीफलेट् वितरित किये जा रहे हैं। इसके बाद भी सरकार आंखें बंद कर बैठी हुई है।

उन्होंने कहा कि जब तक हमें हमारा मौलिक अधिकार नहीं मिल जाता है, जब तक अपराधियों को गिरफ्तार कर उचितदंड नहीं दिया जाता है, तब तक हमारा आमरण भूख हड़ताल चलती ही रहेगी और इस दौरान वे अपनी दवाई भी नहीं लेंगे।

उल्लेखनीय है कि चौधरी दंपति के आमरण भूख हड़ताल वाले स्थान पर उनके साथ पंजाबी, नेपाली सहित और अन्य स्थानीय गैरों दिवासी संप्रदाय की जनता भी मौजूद है।

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