
27 अगस्त 1957 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के पोन्नावरम गांव में जन्मे जस्टिस रमना अपने शांत और मृदुभाषी स्वभाव के लिए पहचाने जाते हैं. 1983 में वकालत शुरू करने वाले रमना आंध्र प्रदेश के एडिशनल एडवोकेट जनरल रहने के अलावा केंद्र सरकार के भी कई विभागों के वकील रह चुके हैं।


नई दिल्ली।

जस्टिस नथालापति वेंकट रमना भारत के 48वें मुख्य न्यायाधीश होंगे। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) एसए बोबडे ने अपने बाद जस्टिस एनवी रमना को उनकी जिम्मेदारी सौंपने की सिफारिश केंद्रीय कानून मंत्रालय को भेज दी है। केंद्र को इस बारे में पत्र भेजने के बाद उन्होंने एक कॉपी जस्टिस रमना को दी। सीजेआई बोबडे 23 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं। कानून मंत्रालय को भेजी चिट्ठी में उन्होंने जस्टिस रमना को 24 अप्रैल से देश के 48वें CJI के तौर पर नियुक्ति की सिफारिश की है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद 24 अप्रैल को जस्टिस रमना शपथ लेंगे।
जस्टिस एनवी रमना सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई के बाद सबसे सीनियर हैं। 27 अगस्त 1957 को जन्मे जस्टिस रमना का कार्यकाल 26 अगस्त, 2022 तक है। वह आंध प्रदेश हाई कोर्ट के पहले ऐसे जज होंगे जो सीजेआई बनेंगे। को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के पोन्नावरम गांव में जन्मे जस्टिस रमना अपने शांत और मृदुभाषी स्वभाव के लिए पहचाने जाते हैं. 1983 में वकालत शुरू करने वाले रमना आंध्र प्रदेश के एडिशनल एडवोकेट जनरल रहने के अलावा केंद्र सरकार के भी कई विभागों के वकील रह चुके हैं। 2000 में वह आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के स्थ्य जज बने। 2014 में सुप्रीम कोर्ट में अपनी नियुक्ति से पहले वह दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के तौर पर उनका कार्यकाल 26 अगस्त 2022 तक होगा. इस तरह वह 16 महीने तक इस अहम पद पर रहेंगे।

सबसे सीनियर जज बनते हैं CJI
नियमों के अनुसार, सबसे सीनियर जज को प्रधान न्यायाधीश के पद पर नियुक्त किया जाता है। कानून मंत्री सही वक्त पर वर्तमान सीजेआई से उनके उत्तराधिकारी का नाम मांगते हैं। सीजेआई से सिफारिशी चिट्ठी मिलने के बाद मंत्री इसे प्रधानमंत्री के सामने रखते हैं जो नियुक्ति को लेकर राष्ट्रपति को सलाह देते हैं।
पिछले कुछ सालों में जस्टिस रमना का सबसे चर्चित फैसला जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट की बहाली का रहा है। सांसदों/विधायकों के खिलाफ लंबित मुकदमों की तेज़ सुनवाई के लिए हर राज्य में विशेष कोर्ट बनाने का आदेश देने वाली बेंच की अध्यक्षता भी उन्होंने ही की थी। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के कार्यालय को सूचना अधिकार कानून (RTI) के दायरे में लाने का फैसला देने वाली बेंच के भी जस्टिस रमना सदस्य रह चुके हैं। उनकी अध्यक्षता वाली 5 जजों की बेंच ने निर्भया गैंग रेप और हत्या मामले के दोषियों की क्यूरेटिव याचिका खारिज की थी। इसके बाद उनकी फांसी का रास्ता साफ हुआ था।



