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संसदीय समिति के सामने पेश हुए फेसबुक इंडिया के चीफ अजीत मोहन, पूछे गए 90 से ज़्यादा सवाल


नई दिल्ली।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के कथित भेदभाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस में शुरू हुए विवाद के बीच फेसबुक इंडिया के प्रमुख अजीत मोहन बुधवार को आईटी मामलों की संसदीय समिति के सामने पेश हुए।

 

समिति ने उनसे तीन घंटे से ज़्यादा चली बैठक में पूछताछ की। कांग्रेस नेता शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने सुनवाई के लिए फेसबुक के प्रतिनिधियों को बुलाया था। सुनवाई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकने के लिए हुई। सुनवाई के दौरान सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद थे।
आईटी मामलों की संसदीय समिति के सदस्यों ने फेसबुक के अधिकारी से 90 से ज्यादा सवाल किए। इस बैठक में तीखी बहस भी देखने को मिली।
यह सुनवाई ऐसे समय में हुई है जब आरोप लग रहे हैं कि फेसबुक के एक वरिष्ठ एग्जीक्यूटिव ने अपनी टीम से भाजपा नेताओं की कुछ पोस्ट पर हेट स्पीच के नियम लागू न करने को कहा था। कांग्रेस इसे बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने इसे लेकर पिछले महीने फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग को पत्र भी लिखा था। 

वहीं, बीजेपी ने अजित मोहन के सामने फैक्ट चेक का मुद्दा उठाया। बीजेपी के सदस्यों ने आरोप लगाया कि अजित मोहन कांग्रेस के लिए काम करते हैं। अजित मोहन ने इन आरोपों को खारिज किया।

फेसबुक इंडिया के चीफ अजित मोहन ने कहा कि वह किसी भी पार्टी से संबंध नहीं रखते हैं। उन्होंने कहा कि मैंने मैकिन्से के साथ काम किया और केरल में कांग्रेस के लिए एक रिपोर्ट बनाई। अजित मोहन के मुताबिक, वह ये रिपोर्ट किसी भी पार्टी के लिए बनाते।

बैठक के बाद फेसबुक का बयान

समिति की बैठक के बाद फेसबुक ने बयान जारी किया है। फेसबुक की ओर कहा गया है कि हम संसदीय समिति को धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने समय दिया। हम एक खुले और पारदर्शी मंच के रूप में और लोगों को आवाज देने और उन्हें खुद को स्वतंत्र रूप से व्यक्त करने की अनुमति देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

बता दें कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में फेसबुक इंडिया को लेकर कई तरह के खुलासे किए गए। इसमें हेट स्पीच के मामलों में भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों को ढील देने जैसे आरोप लगाए गए हैं। इस मसले पर कांग्रेस की ओर से फेसबुक प्रमुख मार्क जकरबर्ग को दो बार चिट्ठी लिखी जा चुकी है।

वहीं, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी मंगलवार को मार्क जकरबर्ग को चिट्ठी लिखी थी, जिसमें उन्होंने फेसबुक पर कई गंभीर आरोप लगाए थे।और उनकी कंपनी पर ‘राजनीतिक भेदभाव’ करने का आरोप लगाया। प्रसाद ने आरोप लगाया है कि फेसबुक के कई शीर्ष अधिकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा अन्य केंद्रीय मंत्रियों के लिए अशोभनीय शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।

प्रसाद ने अपने तीन पेज के पत्र में फेसबुक के कुछ कर्मचारियों पर भारत के प्रति दुर्भावना से ग्रस्त होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों के फेसबुक पेज जानबूझकर बंद किए जा रहे हैं या उनकी पहुंच सीमित की जा रही है। वहीं, इसके खिलाफ ‘राइट टू अपील’ का इस्तेमाल भी नहीं करने दिया जा रहा है। 

प्रसाद ने आरोप लगाया, फेसबुक इंडिया की टीम, खासतौर पर कई वरिष्ठ अधिकारी, एक खास राजनीतिक विचारधारा के समर्थक हैं और उसी आधार पर भेदभाव करते हैं। इस विचारधारा को देश की जनता दो बार लगातार स्वतंत्र व पारदर्शी आम चुनावों में खारिज कर चुकी है। प्रसाद ने पत्र में लिखा कि फेसबुक को संतुलित व निष्पक्ष होना चाहिए।

बता दें कि बढ़ते विवाद के बीच सोशल मीडिया दिग्गज फेसबुक ने कहा है कि साल 2020 की दूसरी तिमाही में उसने दुनियाभर में हेट स्पीच वाली 2.2 करोड़ से ज्यादा पोस्ट अपने प्लेटफॉर्म से हटाये गए हैं।

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