New Delhi : जीएसटी परिषद (GST Council) की गुरुवार को हुई 57 वीं बैठक में देश में व्यापार में आसानी को बढ़ाने के लिए कई फैसले लिए गए, जिसमें रिफंड प्रक्रिया को तेज करना और आईटीसी का विस्तार भी शामिल हैं।

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में रिफंड प्रोसेस को तेज बनाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके तहत अब रिफंड क्लेम को स्वीकार करने की अवधि को 15 दिनों से घटाकर 10 दिन कर दिया गया है। अगर इस समय-सीमा के अंदर न तो कोई रिफंड क्लेम स्वीकार होता है और न ही इसमें किसी कमी के बारे में सूचना जारी की जाती है, तो क्लेम को स्वीकार किया हुआ माना जाएगा।

इसमें किसी अधिकारी के बजाय, सिस्टम रिस्क असेसमेंट के आधार पर क्लेम का 90 प्रतिशत हिस्सा मंजूर करेगा। अभी रिफंड ऑर्डर मिलने के सात दिनों के भीतर जारी किया जाता है, लेकिन अब यह तीन कार्यदिवस दिनों के भीतर जारी कर दिया जाएगा।
इससे कैश लेजर में मौजूद अतिरिक्त बैलेंस का रिफंड पूरी तरह से ऑटोमैटिक हो जाएगा, जिसमें किसी अधिकारी के दखल की जरूरत नहीं होगी।
इन बदलावों से खास तौर पर निर्यातकों और ‘इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर’ के तहत काम करने वाले व्यवसायों को मदद मिल सकती है। रिफंड के लगभग 65 प्रतिशत दावे निर्यातकों या इनवर्टेड रेट्स से जुड़े होते हैं, जबकि 19 प्रतिशत दावे कैश लेजर में पहले से मौजूद बैलेंस से संबंधित होते हैं।
इसके अलावा, जीएसटी परिषद ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का भी विस्तार किया है।
अब कर्मचारियों के लिए गए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस और फैक्ट्रियों के बाहर लगाए गए टेलीकम्युनिकेशन टावर और पाइपलाइन पर आईटीसी मिलेगा। फ्री सैंपल और एक्सपायरी की वजह से राइट-ऑफ किए गए स्टॉक पर भी आईटीसी मिलेगा, बशर्ते कानून के तहत उन सामानों को नष्ट करना जरूरी हो।
सरकार ने कुछ बी2बी (बिजनेस-टू-बिजनेस) सर्विस चेन में दो बार टैक्स लगने से रोकने के लिए भी कदम उठाए हैं। एजेंट के जरिए बुक की गई 7,500 रुपए प्रति रात तक की होटल बुकिंग, रेस्टोरेंट और कैटरिंग सर्विस और पैसेंजर ट्रांसपोर्ट जैसी सर्विस पर अब दो बार के बजाय सिर्फ एक बार टैक्स लगेगा। (IANS)



