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पूर्वी बिहार पूर्वोत्तर झारखण्ड स्पेशल एरिया कमिटी के हार्डकोर नक्सली ने किया आत्मसमर्पण, कहा, मैट्रिक करना है पास

पूर्वी बिहार पूर्वोत्तर झारखंड के हार्डकोर नक्सली सूरज मुर्मू ने सोमवार को मुंगेर में एसएलआर और 28 कारतूस के साथ प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

निधि राजदान ने NDTV छोड़ा


Munger(Bihar): पूर्वी बिहार पूर्वोत्तर झारखंड के हार्डकोर नक्सली सूरज मुर्मू ने सोमवार को मुंगेर में एसएलआर और 28 कारतूस के साथ प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इस दौरान आयुक्त, पुलिस उप महानिरीक्षक, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक मौजूद रहे। 

इस मौके पर प्रमंडलीय आयुक्त संजय कुमार सिंह ने कहा कि नक्सलवाद या उग्रवाद का समाज की मुख्य धारा से जुड़ने का संकल्प निश्चित रूप से एक बेहतर पहल है। ऐसा कर संगठन से जुड़े नक्सली या उग्रवादी न सिर्फ खुद की बल्कि अपने परिवार को भी एक बेहतर जिन्दगी जीने दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि मुर्मू अब अपने परिवार के साथ साथ समाज और क्षेत्र के लिए बेहतरी का प्रयास करेंगे। इन्हें पुर्नवासित करने के लिए सरकार की योजनाओं का लाभ भी दिया जाएगा। 

पुलिस उप महानिरीक्षक संजय कुमार ने कहा कि वास्तव में आज का दिन उपलब्धि भरा है कि नक्सल संगठन से जुड़े सूरज कुमार मुर्मू आज अपने खुद के हथियार एसएलआर व उसके 28 जिंदा कारतूस के साथ जिला प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण कर रहे हैं। 

जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि नक्सली सूरज मुर्मू महज आठवीं पास हैं और बहुत ही कम उम्र में नक्सली संगठन से जुड़ गए। अब ये समाज की मुख्य धारा से जुड़ने के लिए खुद का आत्मसमर्पण कर रहे हैं, तो हमारी पहली प्राथमिकता होगी कि इन्हें दसवीं के साथ-साथ उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया जाएगा। 

इसके अलावे आत्म समर्पण करने वाले नक्सली के लिए निर्धारित सरकारी सुविधा के लिए भी सरकार से अनुरोध कर वैसी सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। साथ ही इनके लिए रोजगार की भी व्यवस्था की जाएगी।

पुलिस अधीक्षक जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी ने कहा कि अगले 3 वर्ष तक इनके आचरण पर नजर रखी जाएगी और अगर इनके द्वारा लगातार अच्छे आचरण का प्रदर्शन तथा समाज की मुख्य धारा से लगातार ये जुड़े रहते हैं तो इन्हें और सरकारी सुविधाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा। 

नक्सली सूरज मुर्मू ने बताया की जब वह 22 साल का था और जंगल में लकड़ी काटने जाता था, तो उसी समय नक्सलियों के द्वारा उसे ले जाया गया और उसके बाद वो नक्सली बन गया। उसे हथियार चलाने कि ट्रेनिंग भी दी गई। उसने बताया कि अब वह पढ़ना चाहता है।

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