
पटना: बिहार में पंचायत चुनाव न होने के बाद भी मुखिया, सरपंच और जिला परिषद सहित तमाम जनप्रतिनिधियों का पावर बरकरार रहेगा। यह फैसला बिहार में कैबिनेट बैठक में लिया गया है। पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। विभाग ने कहा कि पंचायत में परामर्श समिति के अध्यक्ष मुखिया ही होंगे।

बिहार कैबिनेट की मंगलवार शाम मीटिंग हुई है। इसमें त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं को लेकर बड़ा फैसला हुआ है। कैबिनेट ने पंचायती राज संस्थाओं के संचालन के लिए परामर्शी समिति बनाने को मंजूरी दे दी है। अब 16 जून से पंचायती राज संस्थाओं का कामकाज परामर्शी समिति ही देखेगी। इससे पिछली कैबिनेट मीटिंग में पंचायती राज अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दी गई थी। कैबिनेट ने इसके अलावा 9 अन्य एजेंडों पर भी मुहर लगाई है।

विभाग की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि तीन स्तर पर परामर्श समिति बनाई गई है। पहला ग्राम स्तर, दूसरा ब्लॉक स्तर पर और तीसरा जिला स्तर पर। ग्राम स्तर पर मुखिया परामर्श समिति के अध्यक्ष होंगे, जबकि पंचायत समिति के स्तर पर प्रमुख और जिला समिति के स्तर पर जिला परिषद प्रमुख इस कमेटी के अध्यक्ष होंगे।
परामर्शी समिति में अब कौन-क्या करेगा, तय हुआ
- 15 जून के बाद पंचायत और ग्राम कचहरी के निर्वाचित प्रतिनिधि पूर्व की तरह काम करेंगे। पर, इनका पदनाम बदल जाएगा। 16 जून से यह सभी प्रतिनिधि बतौर परामर्शी समिति अध्यक्ष और सदस्य के रूप में काम करेंगे।
- मुखिया संबंधित ग्राम पंचायत की परामर्श समिति के अध्यक्ष कहलाएंगे। उप-मुखिया उपाध्यक्ष एवं ग्राम पंचायत सदस्य (वार्ड सदस्य), सदस्य कहलाएंगे।
- सरपंच संबंधित ग्राम कचहरी की परामर्श समिति के अध्यक्ष कहलाएंगे। उप-सरपंच, उपाध्यक्ष एवं पंच, सदस्य कहलाएंगे।
- पंचायत समिति प्रमुख, संबंधित पंचायत समिति की परामर्श समिति के अध्यक्ष कहलाएंगे। उप-प्रमुख उपाध्यक्ष एवं पंचायत समिति सदस्य, सदस्य कहलाएंगे।
- इसके अलावा पंचायत समिति के सभी कार्यक्षेत्र के विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा एवं राज्यसभा के माननीय निर्वाचित सदस्य भी समिति के सदस्य होंगे। समिति के कार्यक्षेत्र के सभी ग्राम पंचायतों के परामर्शी के अध्यक्ष भी इसके सदस्य होंगे।
- जिला परिषद अध्यक्ष, संबंधित जिला परिषद की परामर्श समिति के अध्यक्ष कहलाएंगे। उप-जिला परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं जिला परिषद के सदस्य, सदस्य कहलाएंगे। इसके अलावा जिला परिषद के कार्यक्षेत्र के विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा एवं राज्यसभा के माननीय निर्वाचित सदस्य भी परामर्शी समिति के सदस्य होंगे।
- कार्यपालक पदाधिकारी की भूमिका प्रखंड विकास पदाधिकारी की होंगी। इस दौरान निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को वेतन व भत्ता भी मिलता रहेगा। यह व्यवस्था आगामी चुनाव के बाद त्रिस्तरीय पंचायत के गठन तक जारी रहेगी।
इन स्थितियों में हो सकेगी कार्रवाई:
सरकारी नोटिफिकेशन में बताया गया है कि परामर्श समिति के कोई भी अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष बिना कारण बताए तीन लगातार बैठक में शामिल नहीं होते हैं तो उनपर कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा, अपने पद का सदुपयोग न करने या दुरपयोग करने पर भी परामर्श समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को हटाया जा सकता है।
कोरोना के कारण टल गया है पंचायत चुनाव
आपको बता दें कि कोरोना के कारण बिहार में पंचायत चुनाव नहीं हो सका है। 2.58 लाख पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल 15 जून को खत्म हो रहा है। इसके मद्देनजर सरकार ने गांव में विकास कार्य ठप न हो जाए इसके लिए परामर्शी समिति बनाने का फैसला किया है। चुनाव होने के बाद इस समिति को भंग कर दिया जाएगा।
इधर, राज्य निर्वाचन आयोग जिलों को दूसरे राज्यों से इवीएम मंगाने की टैंगिंग करने की पहल कर दिया है। पंचायत आम चुनाव में इवीएम जिलों द्वारा खुद दूसरे राज्यों से मंगाया जाता है। ऐसे में जिलों को दूसरे राज्यों से टैग कर दिया जायेगा तो वह जिला खुद अपना इवीएम मंगा लेगा। यह माना जा रहा है कि आयोग दिसंबर के पहले त्रि स्तरीय पंचायत आम चुनाव संपन्न करा लेगा।
कैबिनेट के अन्य महत्वपूर्ण फैसले
- पुलिस मुख्यालय के लिए दंगा निरोधक वाहन खरीदने को 36.41 करोड़ रुपयों की मंजूरी।
- दानापुर-बिहटा एलेवेटेड कॉरिडोर निर्माण के लिए करीब 109 एकड़ भूमि अधिग्रहण के लिए लगभग 456 करोड़ रुपयों की मंजूरी।
- पटना के लॉ कॉलेज घाट पर नेशनल डॉल्फिन रिसर्च सेंटर बनाने के लिए बिल्डिंग बाइलॉज में संशोधन को मंजूरी।



