

पटना।

Corona Effect: बिहार में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस साल फिर रामनवमी पर न तो मंदिरों में जयश्री राम की गूंज होगी और न ही शोभायात्रा निकलेगी। वहीं, रमज़ान और रमजान के मौके पर भी लोग मस्जिदों में न जाकर अपने-अपने घरों में ही इबादत करेंगे।

लगातार दूसरे साल पर्व-त्योहारों पर कोरोना के साये से लोग मायूस हैं। बिहार सरकार के निर्देश पर सभी मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया गया है। ऐसे में भक्त भगवान राम का दर्शन मंदिर जाकर नहीं कर नहीं कर पायेंगे। साथ ही रामनवमी की शोभायात्रा भी नहीं निकलेगी। इसके बदले पूजा समिति पटना में 70 हजार रामनवमी ध्वज लगायेगी। सरकार के निर्देशानुसार मंदिर में श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद है। ऐसे में मुख्य पंडित द्वारा मंदिरों में विधिवत पूजा होगी। हालांकि श्रद्धालु अपने घर में ही रह कर पूजा करेंगे।
रामनवमी के दिन पटना में 40 जगहों से निकाली जाने वाली शोभायात्रा को शासन द्वारा स्थगित कर दिया गया है। श्रीश्री रामनवमी शोभायात्रा अभिनंदन समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। आयोजकों ने बताया कि कोरोना वायरस के खतरे को लेकर सरकार के आह्वान पर शोभा यात्राएं रद्द की गयी हैं।
इस साल रमजान 13 या 14 अप्रैल से शुरू हो रहा है, जबकि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए बिहार में शाम सात बजे तक सभी दुकानें बंद कर दी जायेंगी। इसके साथ ही धार्मिक स्थल भी 30 अप्रैल तक बंद रहेंगे। रमजान के महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग तरावी की नमाज मस्जिदों में जमात के साथ पूरे महीने पढ़ते हैं। लेकिन इस बार भी मस्जिदों में जाकर इबादत नहीं कर सकेंगे।

लोगों में इस बात को लेकर काफी मायूसी भी है कि पिछले साल भी बरकत वाले महीने में मस्जिदों में जाकर इबादत नहीं कर सके थे और इस बार भी नहीं कर पायेंगे।
सरकार द्वारा दिये गये इस निर्देश की वजह से लोगों में नाराजगी भी है कि जब होटल-रेस्तरां व सिनेमा हॉल में 50 प्रतिशत लोगों को जाने की अनुमति दी जा रही है तो धार्मिक स्थल पर क्यों नहीं जाने दिया जा रहा है। इसी संबंध में विभिन्न मुस्लिम संगठन से जुड़े धर्मगुरुओं ने सरकार को पत्र लिखकर 25 प्रतिशत लोगों को धार्मिक स्थल पर जाने देने की अनुमति मांगी है। बिहार के प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थाओं और धर्म गुरुओं ने मुख्यमंत्री से प्रदेश के धर्मस्थलों को खोलने की अपील की है।



