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भूकंप अलर्ट एप एक धोखा: बल्यूटिया

कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता और कुमाऊं मीडिया प्रभारी दीपक बल्यूटिया ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर राज्य में आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने के बजाय मोबाइल ऐप बनाने के नाम पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है।

हल्द्वानी: कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता और कुमाऊं मीडिया प्रभारी दीपक बल्यूटिया ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर राज्य में आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने के बजाय मोबाइल ऐप बनाने के नाम पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है।

बल्यूटिया ने कहा कि भूकंप ज्यादातर देर रात में आते हैं जिस समय लोग गहरी नींद में सोए रहते हैं। ऐसे में एप से 30 से 40 सेकेंड पूर्व चेतावनी मिलने से कैसे लोग अपनी सुरक्षा करेंगे, यह अपने आप में बढ़ा सवाल है। एप से पहले आपदा प्रबंधन को और दुरुस्त करने की आवश्यकता है। उत्तराखण्ड एक विषम भौगोलिक स्थिति वाला राज्य हैं जहां आज भी दूरस्थ गांवों तक पहुंचने की सुविधा नहीं है। ऐसे में आधी रात में 30 मिनट पहले अलर्ट एक धोखा है।

बल्यूटिया का कहना है कि वैज्ञानिकों के अनुसार भूकंप आने का आभास कुछ सेकंड पहले ही हो पाता है। इसके लिए हमें आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने की ओर कदम उठाना चाहिए। लोक-लुभावने वादों के बजाय एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को सभी जरूरी उपकरणों के साथ लैस किया जाना चाहिए। पहाड़ का हर क्षेत्र आपदा की दृष्टि से संवेदनशील है। लिहाजा, अधिक से अधिक युवाओं को आपदा प्रबंधन की ट्रेनिंग देने के साथ ही उन्हें उपकरण उपलब्ध कराए जाने चाहिए ताकि सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भी किसी भी प्रकार की आपदा आने पर वहां के युवा प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र के पहुंचने से पहले लोगों के बचाव एवं राहत कार्य में अपना योगदान दे सकें।

प्रवक्ता ने कहा कि चमोली जिले के रैणी गांव के पास ग्लेशियर टूटने से ऋषि गंगा व धौलीगंगा में तेज जल प्रवाह से बड़ी आपदा आ गई थी। इस आपदा में जहां कई लोग मारे गए वहीं एक दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क टूट चुका था। समुचित उपकरण और तकनीकी अभाव में टनल में फंसे लोगों को नहीं बचाया जा सका। सरकार को चाहिए कि वह जनता को मोबाइल ऐप के जरिए अलर्ट करने के बजाए आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने की ओर कदम उठाना चाहिए। सरकार को ग्लेशियरों में बन रही झीलों के पानी को डिस्चार्ज करने के पर्याप्त इंतजाम करने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सरकार राज्य की जनता को आपदा से बचाने के लिए पूरी तरह असफल साबित हुई है। गढ़वाल के तपोबन रैणी में आई आपदा इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।

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