झारखण्ड।

झारखंड में विधानसभा चुनाव का नतीजा आये एक माह पूरा होने को है, लेकिन नतीजे के बाद से ही सूबे में बीजेपी की सियासत मौन है।

झारखंड में अब तक अपने विधायक दल के नेता का बीजेपी ने चयन तक नहीं किया है. जिसपर कांग्रेस और जेएमएम चुटकी भी ले रही है.
अबतक नेता प्रतिपक्ष का नहीं चुन पाना भले ही बीजेपी का अंदुरुनी मामला है, लेकिन इस मामले पर जेएमएम इसे बीजेपी को उनका दिवालियापन बता रही है, तो कांग्रेस दाल में कुछ काला बता रही है.

वहीं, इन सबके बीच सियासी हलकों में यह चर्चा है कि भारतीय जनता पार्टी जेवीएम के बाबूलाल मरांडी के इंतजार में बैठी है. झारखंड में बीजेपी के सत्ता से खिसक जाने के बाद और पुराने नेताओं के दामन छोड़ देने के बाद से ही यह चर्चा उठ रही थी कि बाबूलाल मरांडी अपने पुराने पार्टी में वापसी कर सकते हैं. चर्चा ये है कि बाबूलाल की वापसी होते ही बीजेपी को अपने विधायक दल का नेता मिल जायेगा, जो सदन में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभाएगा.
इधर, जेएमएम की मानें तो बीजेपी द्वारा विधायक दल का नेता नहीं चुने जाने के कारण प्रोटोकॉल का पेंच विधानसभा की डायरी में भी फंस गया है जो छप नहीं पा रहा.
प्रदेश में बीजेपी के अब तक सदन में अपने नेता के चयन नहीं होने पर कांग्रेस भी खुब चुटकी ले रही है. कांग्रेस ने कहा कि यहां दाल में कुछ काला है. पटकथा उनकी तैयार है बस पर्दा उठना बाकी है. जैसा बोला जा रहा था उसी रास्ते पर बाबूलाल मरांडी भी जाते दिख रहे हैं.
अब देखना है कि झारखंड में बीजेपी का क्या स्टैंड होगा ? पार्टी की सियासत किस ओर रूख करेगी, इस पर खूब चर्चा हो रही है. क्योंकि खुलकर ना तो बाबूलाल ही कुछ बोल रहे और ना ही बीजेपी ने कुछ कहा है. हां सुगबुगाहट जरूर दिख रही, तारिफों के कसीदे जरूर पढ़े जा रहे.
अबतक नेता प्रतिपक्ष का चुनाव न होने पर बड़ा सवाल यही है कि क्या झारखंड में बीजेपी की सियासत बाबूलाल मरांडी के भरोसे ही टिकी है ?



