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बागियों के तेवर से सकते में मुख्य पार्टी के प्रत्याशी,कांग्रेस-भाजपा के लिये मुसीबत बने बागी

 By: Ashok Ashk 

बोकारो।

बोकारो विधानसभा सीट पर मुख्य पार्टी, भाजपा  और कांग्रेस,  प्रत्याशी बागियो के तेवर से सकते में हैं । बागियों ने इन प्रत्याशियो को चिन्ता में डाल दिया है । मान-मनौव्वल का प्रयास भी किया गया लेकिन सफलता नहीं मिली । कांग्रेस प्रत्याशी  श्वेता सिंह और भाजपा प्रत्याशी व  सिटिंग एमएलए बिरंची नारायण के सामने बागियों के तेवर ने संकट खड़ा कर दिया है ।

पिछले चुनाव में एनडीए ने मिलकर चुनाव लड़ था । लेकिन,  इस बार एनडीए के तीन दल अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं । भाजपा से बिरंची नारायण, आजसू  से पुराने भाजपाई राजेन्द्र महतो और जनता दल युनाईटेड से अशोक चौधरी चुनाव मैदान में हैं । राजेन्द्र महतो का प्रयास था कि इस बार भाजपा उसे मौका दे । लेकिन भाजपा ने उनकी उम्मीद पर पानी फेर दिया । नतीजतन, राजेन्द्र महतो ने भाजपा को बाई बाई कह दिया। भाजपा प्रत्याशी बिरंची नारायण के लिये राजेन्द्र महतो का पार्टी छोड़ना घातक सिद्ध हो सकता है ।

राजेन्द्र महतो ने ग्रामीण क्षेत्रों में अपना वोट बैंक बनाने के लिये काफी मेहनत की है और नतीजा बेहतर ही हुआ है। जनता दल युनाईटेड से अशोक चौधरी का चुनाव लड़ना भी चिन्ता का विषय बना हुआ है। अशोक चौधरी इससे पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं और काफी वोट बटोरने में सफल भी रहे हैं ।

कांग्रेस प्रत्याशी श्वेता सिंह के सामने कई संकट है । महागठबंधन की उम्मीदवार श्वेता सिंह को कांग्रेस और जेएमएम के बागियों से चुनौती मिली हुई है । युवा कांग्रेस के नेता महादेव शर्मा उर्फ देव शर्मा टिकट की आस लगाये बैठे थे लेकिन कांग्रेस ने उन्हें मौका नहीं दिया । नाराज देव शर्मा पार्टी के सभी पदों को त्याग कर चुनाव मैदान में कूद गये हैं । इन्हें मनाने के लिये कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता उनके घर भी गये लेकिन देव शर्मा ने किसी की नहीं सुनी ।

उधर संजय कुमार सिंह कांग्रेस छोड़कर चुनाव मैदान में कूद गये हैं । कांग्रेस ने पहले संजय सिंह को अपना प्रत्याशी घोषित किया था और पार्टी सिंबल भी आवंटित कर दिया था। संजय सिंह ने प्रचार अभियान भी शुरू कर दिया था। लेकिन इसी बीच कांग्रेस ने प्रत्याशी बदलने की घोषणा करते हुये श्वेता सिंह को अपना उम्मीदवार बना दिया । इसको लेकर संजय सिंह ने नाराजगी भी प्रकट की और वे निर्दलीय चुनाव मैदान में किस्मत आजमाने  उतर गये । इन्हें एक जाति का समर्थन भी मिल रहा है ।

महागठबंधन के दूसरे दल झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के एक युवा नेता राजेश महतो ने भी बगावत कर दी है. पार्टी से टिकट की उम्मीद लगाये बैठे राजेश महतो पर जब पार्टी ने भरोसा नहीं किया तो उन्होंने भी बगावत का झण्डा उठा लिया और वे निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं । यहां यह बताना जरूरी है कि राजेश महतो बिहार के पूर्व मंत्री और बोकारो के पूर्व विधायक अकलू राम महतो के पुत्र है । अकलू राम महतो का अपना तो वोट बैंक है ही,  राजेश महतो ने भी कुछ वर्षों में अपनी एक अलग पहचान  बनाने में सफलता हासिल की है ।

बहरहाल,  बोकारो विधानसभा सीट पर बागियों ने चुनावी समीकरण को बिगाड़ कर रख दिया है । देखना यह होगा कि ये बागी कितना वोट बटोर पाते हैं और किस-किस को कितना नुकसान पहुंचाते हैं । 

 लेखक अशोक अश्क बोकारो के वरिष्ठ पत्रकार हैं। 

नमन

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