
नई दिल्ली
भारतीय हॉकी के इतिहास में आज का दिन काफी ऐतिहासिक है। 93 वर्ष पहले आज ही के दिन 26 मई 1928 को एम्सटर्डम ओलंपिक में भारतीय टीम ने अपना पहला स्वर्ण पदक जीता था। भारतीय खिलाड़ी मेजर ध्यान चंद ने इसी ओलंपिक से अंतरराष्ट्रीय हॉकी जगत के सामने खुद का लोहा मनवाया। यहीं से उन्हें “हॉकी का जादूगर” का नाम भी मिला। मेजर ध्यान चंद ने इस टूर्नामेंट में सर्वाधिक 14 गोल किये। 1928 से 1956 तक लगातार ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीत कर अपनी श्रेष्ठता दर्ज करवाई।

इसके अलावा इस ओलंपिक के दौरान पहली बार ओलंपिक मशाल जलाई गई व पहली बार प्रतिभागी टीमों के मार्च पास्ट की परंपरा शुरू हुई जिसमें ग्रीस की टीम ने नेतृत्व किया और मेजबान टीम सबसे पीछे रही।

खास बात यह है कि 1928 के एम्सटर्डम ओलंपिक 28 जुलाई को शुरू हुए थे लेकिन ग्राउंड हॉकी को करीब दो महीने पहले 17 से 26 मई 1928 को ही शुरू कर दिया था। 28 जुलाई से 12 अगस्त तक हुए इन खेलों में 46 देशों के 2883 खिलाडियों ने 14 खेलों के 109 मुकाबलों में भाग लिया था।
बता दें कि भारत ने हॉकी में कुल 11 ओलंपिक पदक जीते। इनमें आठ स्वर्ण पदक, एक रजत पदक और दो कांस्य पदक हैं। इनमें अंतिम स्वर्ण पदक 1980 में मास्को ओलंपिक हासिल हुआ।


