देवघर:

झारखण्ड राज्य के संथाल परगना क्षेत्र में उपस्थित देवघर, शहर अपनी नैसर्गिक सुन्दरता और धार्मिक स्थलों के कारण एक अलग महत्व रखता है। शांति और भाईचारे का प्रतीक यह शहर आस्थाओं का एक महत्वपूर्ण केन्द्र है।



धार्मिक दृष्टि से बाबा बैद्यनाथ का अपना अलग महत्व होने के कारण सावन के पावन महीने में श्रद्धालुओं का जत्था द्वादश ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक करने यहाँ पहुँच रहे है।
ऐसे में यहां आगंतुक कई काँवरिया अपने काँवर को इतने सुंदर ढंग से सजाकर लाते हैं कि उनका काँवर लोगों के बीच आकर्षण का केन्द्र बन जाता है। इन्हीं काँवरियों में से आज लोगों के आकर्षण का मुख्य केन्द्र कोलकाता (पश्चिम बंगाल) से आए 51 काँवरियों का एक जत्था है. जो 51 किलो का आकर्षक ढंग से सजा काँवर लेकर आए हैं। इस काँवर में पीतल का एक त्रिशूल, कुछ सर्प एवं शिवलिंग है। इसमें कुल 101 बड़े पीतल के घुंघरू लगे हैं. जिससे निकली ध्वनि लोगों का मन मोह रही है। इस काँवर में पीतल के जलपात्र में ही गंगाजल भर कर लाया गया है। इस काँवर को देखकर इन श्रद्धालुओं की बाबा के उपर श्रद्धा एवं लाख कठिनाईयों के बावजूद इतने भारी काँवर को लाकर जल अर्पित करने की इच्छा शक्ति देखी जा सकती है।


