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बाबूलाल मरांडी का अपमान करना बंद करिए, नहीं तो जनता का आक्रोश आपको भी झेलना पड़ जाएगा हेमंत बाबू

By Krishna Bihari Mishra

मेरे विचार से किसी के भी साथ इतनी घृणा, द्वेष, ईर्ष्या ठीक नहीं। राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और उनके कूनबे को यह नहीं भूलना चाहिए कि राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी ऐतिहासिक पुरुष हैं, क्योंकि उन्होंने पहली बार झारखण्ड की सत्ता संभाली, साथ ही वे जितने वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे, उनके द्वारा किये गये कार्य इस बात के प्रमाण है कि कई मुख्यमंत्री आये और गये, पर उनके द्वारा किये गये कार्यों को लेकर खींची गई लंबी लाइन को आज तक कोई पार नहीं कर सका।

ऐसे भी वैचारिक लड़ाई को जब आप निचले स्तर तक ले जायेंगे तो इसका खामियाजा आज न कल, देर-सवेर आपको ही भुगतना पड़ेगा, ये सोचना कि हमारी स्थिति बराबर ऐसी ही रहेगी, गलत है। नहीं तो, जाकर पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास का घर देख लीजिये, रघुवर दास को तो जानते ही हैं, जो आपके पहले मुख्यमंत्री थे।

भाजपा के गोड्डा सांसद निशिकांत दूबे ने हालांकि ट्विटर के माध्यम से कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की हैं, तथा प्रतिक्रिया व्यक्त करने के दौरान उन्होंने बड़े ही कड़े शब्दों का प्रयोग किया है, आम तौर पर इससे उन्हें बचना चाहिए, फिर भी अपने विरोधियों के आक्रोश को झेलना भी एक प्रकार की कला है, जो सिर्फ और सिर्फ राजनीतिज्ञों को ही आती हैं, ऐसे में आप कैसे भूल रहे हैं, ये सभी को आश्चर्य लग रहा हैं। 

हैं। जरा देखिये निशिकांत दूबे ने क्या कहा – “राज्य के नये राज्यपाल रमेश वैस के शपथ ग्रहण समारोह में प्रथम मुख्यमंत्री व विधायक दल के नेता बाबू लाल मरांडी को आमंत्रित नहीं कर झारखण्ड सरकार ने परम्परा तोड़ते हुए डर व घटिया मानसिकता का परिचय दिया है, इसकी जितनी निंदा की जाय, वह कम है।”

(लेखक झारखंड के वरिष्ठ पत्रकार है. आलेख उनके निजी विचार है.)

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