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आखिरकार! हर्ड इम्युनिटी को क्यो नकारा जा रहा है ?

By: Girish Malviya 

 

अमेरिकी हेल्थ सर्विसेज के निदेशक एंथनी फोसी ने कहा है कि अगर 70-75 फीसदी ने कोविड 19 का टीका नहीं लिया तो हर्ड इम्यूनिटी नहीं बन पाएगी और इससे टीकाकरण का पूरा अभियान ही फेल होने का डर है। ……हैंबर्ग यूनिवर्सिटी ने भी अध्ययन कर यही बात कही है। विशेषज्ञों के अनुसार, कोरोना से ज्यादा प्रभावित देशों में तो यह बेहद जरुरी है कि 75 फीसदी आबादी को टीका लगे।……

यानी टीके से आए तो ठीक ऐसे ही आ जाए तो गलत, वाह रे दुनिया के सबसे बड़े वायरस विशेषज्ञ ?

WHO का भी कहना है कि इतने दिनों में कोविड-19 के खिलाफ हर्ड इम्यूनिटी जैसे हालत पैदा नहीं हुए हैं और इसके भरोसे रहने का अब कोई मतलब नहीं है. आज तक हुए अधिकतर अध्ययनों में यही बात सामने आई है कि सिर्फ 10 से 20 प्रतिशत आबादी में ही संबंधित एंटीबॉडीज हैं, जो लोगों को हर्ड इम्यूनिटी पैदा करने में सहायक हो सकते हैं.

WHO ने कहा कि अब वैक्सीन ही अंतिम विकल्प बचा हुआ है. यानी अब यह बिल्कुल साफ नजर आ रहा है कि WHO ओर अमेरिकन फार्मा लॉबी हर्ड इम्युनिटी के नाम पर दुनिया मे  पूरी तरह से अनिवार्य वेक्सीनेशन का प्रोग्राम लागू करना चाहती है, 

आप खुद ही सोचिए कि अगर बिना वेक्सीनेशन के हर्ड इम्युनिटी आ जाती है तो WHO ओर अमेरिकी फार्मा लॉबी को तकलीफ क्या है ?

यदि सीरो सर्वे का भरोसा करे तो भारत मे हम हर्ड इम्युनिटी के काफी करीब है। 

भारत मे सोमवार को पुणे के कुछ इलाकों में 50% से ज्‍यादा सीरो-पॉजिटिविटी होने की बात सामने आई थी। इसके अलावा मुंबई के स्‍लमों में भी 57% पॉजिटिविटी देखने को मिली। दिल्‍ली में सीरो-पॉजिटिविटी का आंकड़ा 29% रहा जबकि महाराष्‍ट्र में 27% लोग वायरस के प्रति एक्‍सपोज हुए। ठाणे का हर तीसरा शख्‍स सीरो पॉजिटिव मिला  देशभर में थायरोकेयर लैबोरेटरी की तरफ से किए गए ऐंटीबॉडी टेस्‍ट्स में पता चला कि लोकल लेवल पर पॉजिटिविटी ज्‍यादा है भारतीयों की औसत उम्र 29 साल है जबकि अमेरिका में 45 साल यह तथ्य बता रहा है कि भारत मे हर्ड इम्युनिटी आने की संभावना अधिक है

सबसे बड़ा उदाहरण तो मुंबई का धारावी है जहाँ पिछले दो महीनों से लगभग जीरो ट्रांसमिशन दर्ज कर रहा है। यह इलाका अप्रैल-मई में देश का सबसे बड़ा हॉटस्‍पॉट था।, यही बात इंदौर में देखी जा रही है इंदौर कलेक्टर का बयान है कि कोरोना हॉट स्पाट में रहने वाले लोगों में हर्ड इम्युनिटी पैदा हो गई, अगर यही बात आप अपने शहर के हॉट स्पॉट इलाको के बारे में भी महसूस करेंगे !…..वहाँ भी केसेस लगातार कम होते जा रहे हैं.

आखिर इन हॉट स्पॉट इलाको में वायरस वहा गायब कैसे हो गया ? साफ है कि वहाँ हम हर्ड इम्युनिटी प्राप्त कर चुके हैं.

सिर्फ भारत मे ही नही बल्कि पूरे विश्व मे हम हर्ड इम्युनिटी की ओर बढ़ रहे हैं ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने दावा किया था कि ब्रिटेन में कुछ लोगों के बीच हर्ड इम्यूनिटी विकसित हो रही है. अमेरिका न्यूयॉर्क के कुछ इलाकों में भी हर्ड इम्युनिटी की बात सामने आ रही है.

अब एक बात पर विशेष रूप से विचार करे जैसे ही कोरोना को लेकर कोई भी पॉजिटिव विचार आता है WHO उसे गलत सिद्ध करने के लिए प्राण प्रण से जुट जाता है , अगर हर्ड इम्युनिटी वेक्सीन से आए तो ही सही है लेकिन यदि समाज मे लोगो के शरीर मे कोरोना से लड़ते वक्त खुद ब खुद ऐंटीबॉडी विकसित हो जाए तो वो गलत है……

ओर अगर विशेषज्ञ यह कहते हैं कि लोगों में कोरोना के विरुद्ध बनने वाली यह ऐंटीबॉडी स्थायी नही है कुछ महीनो बाद गायब हो जाएगी तो वह क्या वह गारण्टी ले रहे हैं कि उनकी लगाई वेक्सीन से हमे स्थायी इम्युनिटी प्राप्त हो जाएगी ?

यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन कोई यह बात उठाना नही चाहता !…… क्यों नही यह बात उठती है आप स्वंय सोचिए ?

Disclaimer: ये लेखक के निजी विचार हैं. ये लेख मूल रूप से उनके फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है.

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