देवघर।

कोविड-19 महामारी को लेकर यूं तो देश में लाॅकडाउन जारी है. झारखंड में भी तमाम तरह के प्रतिबंध प्रभावी हैं। इस बीच देवघर का विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला भी धीरे-धीरे नजदीक आ रहा है। वैसे तो देश के सभी धार्मिक स्थल आम लोगों के लिए बंद है। फिर भी बदली हुई परिस्थिती में कभी भी अगर धार्मिक स्थलों पर लोगों की आवाजाही की इजाज़त अगर मिलती है तो सोशल डिस्टेंसिंग को मेंटेन करते हुए मंदिरों में लोगों को कैसे प्रवेश कराया जाये, यह एक चुनौती भरा कार्य होगा।
बाबा मंदिर में मॉक ड्रील

देवघर जिला प्रशासन ने इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर बाबा बैद्यनाथ मंदिर में एक माॅक ड्रिल का आयोजन किया. माॅक ड्रिल के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए भक्तों को कैसे जलार्पण कराया जा सकता है, इसकी प्रैक्टिस की गयी. पूरा माॅक ड्रिल देवघर डीसी-एसपी व अन्य वरीय पदाधिकारियों की मौजूदगी में किया गया. माॅक ड्रील के दौरान प्रावधानों के द्वारा तय सामाजिक दूरी का पालन करते हुए पुलिस कर्मी एक-एक कर कतार के माध्यम से मंदिर के मुख्य द्वार के सामने से दर्शन कर आगे बढ़ते रहे. यहां पर पदाधिकारियों द्वारा इस बात पर गौर किया गया कि एक व्यक्ति को आकर और चले जाने में कितना वक्त लग रहा है.

श्रावणी मेला के दौरान हर रोज हजारों की तादाद में बाबा का दर्शन करने भक्त पहुंचते हैं. वहीं यह संख्या सावन के सोमवार को लाखों की हो जाती है. ऐसे में देवघर डीसी का कहना है कि अभी तो मंदिर बंद है, लेकिन भविष्य में अगर इसे खोलने की इजाज़त मिलती है तो भक्तों को कैसे दर्शन कराया जाये, इसका व्यवहारिक आंकलन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस माॅक ड्रील के आधार पर सरकार को प्रस्ताव भेजा जायेगा. जिसमें सभी बिंदुओं पर ध्यान देते हुए यह तय किया जायेगा कि श्रावणी मेला के दौरान आने वाली भक्तों की बड़ी भीड़ को कैसे नियंत्रित कर दर्शन कराया जाये. हालांकि डीसी ने स्पष्ट किया कि जो भी फैसला होना है वो सरकार के स्तर व श्राइन बोर्ड के द्वारा करना है।


