
Ranchi: सीएम हेमंत सोरेन द्वारा ईडी के समन को चुनौती देने वाली क्रिमिनल रिट पिटीशन की सुनवाई शुक्रवार को हाईकोर्ट में हुई। मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई।

याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि समन का समय बीत चुका है इसलिए यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। जिस समन को चुनौती दी गई है उसका समय बीत चुका है। इससे पहले ईडी की ओर से एडीशनल सॉलीसीटर जनरल ऑफ़ इंडिया एसवी राजू ने कहा कि इस केस को निरस्त कर देना चाहिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट समन के मामले को डिसाइड कर चुकी है।

वहीं हेमंत सोरेन की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के एक जजमेंट का हवाला देते हुए कहा कि अगर आप किसी मामले में आरोपी नही है, आपके खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं है तबतक समन जारी नहीं किया जा सकता है। मामले की सुनवाई हाइब्रिड मोड में हुई।
बता दें कि बीते 11 अक्टूबर बुधवार को हुई पिछली सुनवाई में सीएम हेमंत सोरेन की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने पक्ष रखा था। उनकी ओर से कोर्ट को बताया गया था कि हेमंत सोरेन को ईडी की ओर से जो समन जारी किया गया है, वह एक गवाह के रूप में किया गया है या आरोपी के रूप में किया गया, इसकी जानकारी नहीं गई है साथ ही हेमंत सोरेन की ओर से अपनी संपत्ति की जानकारी उन्होंने दाखिल किए गए आईटी रिटर्न में दी है। उनकी ओर से यह भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के पंकज बंसल वर्सेस केंद्र सरकार के मामले में कहा गया है कि ईडी के साथ सहयोग नहीं करने पर गिरफ्तारी नहीं की जा सकती है। हेमंत सोरेन के खिलाफ कोई क्रिमिनल ऑफेंस भी नहीं है और कोई एफआईआर भी दर्ज नहीं है। तो ऐसे में पीएमएलए के तहत उन्हें समन जारी करना गलत है।
बता दें कि ईडी की ओर से पूछताछ को लेकर सीएम हेमंत सोरेन को जारी किए गए समन को सीएम हेमंत सोरेन ने पहले सुप्रीम कोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट की सलाह पर 23 सितंबर को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी है। सीएम की ओर से दाखिल की गई क्रिमिनल रिट पिटीशन में कहा गया है कि ईडी को समन के आधार पर उन पर कार्रवाई से रोका जाए। साथ ही ईडी को आगे कोई समन जारी नहीं करने करने का भी आग्रह कोर्ट से किया गया है। सीएम ने ईडी पर चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की साजिश करने सहित पीएमएलए 2002 की धारा 50 और 63 की वैधता को चुनौती दी है।


