
देवघर: दिसंबर 2019 के बाद दुनिया में कोरोना वायरस की दस्तक के बाद काफी कुछ बदल गया है. दुनिया के विभिन्न देश सख्त से सख्त नियमों को लागू कर रहे हैं ताकि महामारी को काबू में किया जा सके. पूरी दुनिया में व्यापार चरमरा गए है, जिसमें भारत भी शामिल है. भारत के कई राज्यों में आर्थिक गतिविधियों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. ऐसे हालात में जब कोरोना वायरस महामारी के दुष्परिणाम दुनिया भर में महसूस किए जा रहे हैं, कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों को मौजूदा स्थिति के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. जिसमें रीयल एस्टेट सेक्टर भी बहुत अधिक प्रभावित हुआ है.

2020 की कोरोना लहर के बाद रीयल एस्टेट में थोड़ी जान आ रही थी. लेकिन दूसरी लहर ने रीयल एस्टेट पर गहरा कुठाराघात किया. प्रॉपर्टी की बिक्री, नए प्रोजेक्ट लॉन्च और कमर्शियल रेंटल में गिरावट आ चुकी है, पहली और दूसरी लहर के दौरान राज्यों द्वारा वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए अन्य स्थानीयकृत प्रतिबंधों का इस सेक्टर पर गहरा असर देखा जा रहा है.

रिपोर्टों के अनुसार, होमबॉयर्स कोविड की स्थिति को देखते हुए सतर्क हो गए हैं और किसी भी साइट विजिट से बचने लगे हैं. कई लेन-देन को भी रोक दिया गया है क्योंकि उपभोक्ता अब घरों सहित गैर-आवश्यक वस्तुओं पर कम खर्च करने का विकल्प चुन रहे हैं.
रुक सी गई है संथाल के रीयल एस्टेट क्षेत्र की गतिविधियां
बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों का भी यही हाल है. जहाँ रीयल एस्टेट गतिविधियां रुक सी गई है. झारखण्ड के संथाल परगना जहाँ कुछ साल पहले से ही रीयल एस्टेट ने रफ्तार पकड़ी थी, कोरोना ने इस रफ़्तार पर लगाम लगा दिया है. एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि कोविड की दूसरी लहर ने संथाल के रीयल एस्टेट क्षेत्र की मासिक वृद्धि की गति को प्रभावित किया है. यहाँ आर्थिक गतिविधियों पर ब्रेक तो लगा ही है. रियल एस्टेट डेवलपर्स भी संघर्ष कर रहे हैं.
हाउसिंग सेक्टर की रिकवरी को कोविड ने किया चौपट
कोविड की दूसरी लहर कई रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए सदमे के रूप में आई, जो अप्रैल से सभी मोर्चों पर संघर्ष कर रहे हैं, क्योंकि होमबॉयर्स की संख्या बहुत कम हो गई है. श्रम की कमी के कारण परियोजना पूर्ण होने में देरी हो रही है.
संथाल परगना बिल्डर्स एसोसीएशन के अध्यक्ष संजीत कुमार सिंह ने कहा कि घरों की बिक्री में 30-40 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है. दूसरे सबसे बड़े रोजगार प्रदाता भारतीय रियल एस्टेट पर न सिर्फ जीडीपी ग्रोथ के मकसद से बल्कि रोजगार पैदा करने के लिए भी, इस सेक्टर से जुड़े 250 से ज्यादा इंडस्ट्रीज पर विभिन्न प्रकार का असर पड़ा है. इसके लिए सरकार को कदम उठाने की जरूरत है. संजीत सिंह ने कहा कि रियल एस्टेट को आर्थिक मजबूती प्रदान करने के लिए बैंकों द्वारा लोन पर कम से कम तीन से चार माह का मोडेटिरियम मिलना चाहिए . साथ ही सरकार द्वारा आर्थिक पैकेज की मदद करनी चाहिए.
संजीत सिंह ने इस बात पर चिंता जाहिर की कि एक तो बिल्डरों को 5% जीएसटी पर इनपुट नहीं मिलता है. वहीं, बिल्डिंग मेटेरिअल पर भी जीएसटी देना पड़ता है, सरकार को इन दोनों बिन्दुओ पर विचार कर राहत के बारे में सोचने की आवश्यकता है.
महामारी ने ग्राहकों को दिलाया होम ओनरशिप का अहसास
हालांकि प्रभाव का आकलन करना जल्दबाजी होगी, लेकिन महामारी ने ग्राहकों को होम ओनरशिप का भी अहसास दिला दिया है. ये रिहायशी रियल एस्टेट के लिए अच्छा कदम है. इसमें भी बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि देश संभावित तीसरी लहर से कैसे निपटता है.
वहीं, कोरोना वायरस के कारण पैदा हुए हालातों से निपटने के लिए सरकार ने कई ऐलान किए हैं, जिससे राहत मिल सकती है.


