Deoghar: बाबा बैद्यनाथ की पावन नगरी देवघर स्थित सिविल कोर्ट परिसर में सोमवार को झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (JHALSA), रांची के तत्वावधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, देवघर एवं जिला प्रशासन के संयुक्त सहयोग से राज्य स्तरीय विधिक सेवा-सह-सशक्तिकरण शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने झारखंड में बच्चों के संरक्षण, शिक्षा और सुरक्षा के लिए संचालित प्रोजेक्ट शिशु जैसी योजनाओं को पूरे देश में लागू करने की जरूरत बताई।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपने संबोधन में कहा कि न्याय का वास्तविक अर्थ केवल न्यायालय तक पहुंचना नहीं, बल्कि आम नागरिक को उसके अधिकारों का वास्तविक लाभ मिलना है। किसी वृद्ध महिला को रुकी हुई पेंशन मिलना, किसी श्रमिक को उसकी मेहनत की मजदूरी प्राप्त होना, किसी बच्चे को शिक्षा जारी रखने का अवसर मिलना और किसी पीड़ित परिवार को समय पर सहायता उपलब्ध होना भी न्याय की सार्थक अभिव्यक्ति है। उन्होंने विधिक सेवा संस्थाओं से आग्रह किया कि वे जरूरतमंदों तक स्वयं पहुंचें और उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुनें।

झारखंड की सामाजिक एवं भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जनजातीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्थानीय भाषाओं के माध्यम से विधिक जागरूकता फैलाने की जरूरत है। इसमें पारा विधिक स्वयंसेवकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। मुख्य न्यायाधीश ने सैनिकों एवं उनके परिवारों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई ‘नालसा वीर परिवार सहायता योजना’ तथा लंबित विवादों के आपसी सहमति से समाधान के लिए संचालित ‘मीडिएशन फॉर द नेशन’ अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने प्रोजेक्ट शिशु के तहत बच्चों की शिक्षा एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को निरंतर सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
उन्होंने संबंधित विभागों एवं विधिक सेवा संस्थाओं को शिविर के बाद भी लंबित आवेदनों की नियमित समीक्षा करने, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा लाभार्थियों को सहायता की स्थिति से अवगत कराने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शिविर की वास्तविक सफलता तभी होगी, जब प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति इस विश्वास के साथ घर लौटे कि उसकी बात सुनी गई है और उसकी समस्या के समाधान के लिए संस्थाएं उसके साथ खड़ी हैं।
10 हजार से अधिक लाभुकों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य
स्वागत एवं उद्घाटन संबोधन में झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद, कार्यकारी अध्यक्ष झालसा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय शिविर का मुख्य उद्देश्य विधिक अधिकारों की जानकारी को वास्तविक सहायता एवं सरकारी योजनाओं के लाभ से जोड़ना है, ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक न्याय और सहायता पहुंच सके। कोई भी व्यक्ति केवल जानकारी, आवश्यक दस्तावेज अथवा उचित मार्गदर्शन के अभाव में अपने अधिकारों से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने पालामू एवं रांची में विधिक सहायता क्लिनिकों की स्थापना, पीड़ितों को सहायता, प्रोजेक्ट शिशु तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ वितरण को महत्वपूर्ण पहल बताया।
उन्होंने कहा कि इस शिविर के माध्यम से 10 हजार से अधिक लाभार्थियों को नालसा, झालसा एवं विभिन्न सरकारी विभागों की योजनाओं का लाभ प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि शिविर की सफलता केवल लाभ वितरण तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि प्रत्येक लाभार्थी तक सहायता पहुंचाना और लंबित आवेदनों पर कार्रवाई करना भी जरूरी है।
प्रोजेक्ट शिशु की सराहना
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति चंद्रशेखर ने अपने संबोधन में ‘मीडिएशन फॉर द नेशन’ अभियान एवं ‘नालसा वीर परिवार सहायता योजना’ सहित मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पहल पर संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से हजारों जरूरतमंद लोगों को विधिक सहायता एवं राहत मिली है। वहीं, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने झारखंड में बच्चों के संरक्षण एवं उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने की दिशा में संचालित ‘प्रोजेक्ट शिशु’ की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से झारखंड के अनाथ एवं जरूरतमंद बच्चों को विधिक सहायता तथा आवश्यक संरक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया गया है। बच्चों के बेहतर भविष्य, शिक्षा, सुरक्षा एवं समुचित देखभाल सुनिश्चित करने में विधिक सेवा संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।
दो स्थानों पर विधिक सहायता क्लिनिक का वर्चुअल उद्घाटन
कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने वर्चुअल माध्यम से पालामू स्थित भीष्म नारायण सिंह विधि महाविद्यालय तथा रांची स्थित सरला बिरला विश्वविद्यालय में स्थापित विधिक सहायता क्लिनिक का विधिवत उद्घाटन किया। इन क्लिनिकों के माध्यम से लोगों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की गई है।
1,880 लाभुकों के बीच 14.46 करोड़ की परिसंपत्तियों का वितरण
शिविर में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत एवं मंचासीन अन्य न्यायमूर्तियों के हाथों विभिन्न सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत चयनित पात्र लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण किया गया। इस अवसर पर कुल 1,880 लाभुकों के बीच 1,446.90 लाख रुपये यानी 14 करोड़ 46 लाख 90 हजार रुपये की राशि विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत वितरित की गई। इसके अलावा विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभुकों एवं पीड़ितों को चेक के माध्यम से सहायता राशि एवं प्रतिकर राशि प्रदान की गई। इस पहल का उद्देश्य जरूरतमंदों, वंचितों एवं पीड़ित व्यक्तियों को आर्थिक संबल प्रदान करने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर एवं सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित करना रहा। विशेष रूप से पीड़ितों को प्रतिकर राशि का भुगतान न्याय एवं पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
न्यायपालिका और प्रशासन के समन्वय पर जोर
इस राज्य स्तरीय शिविर का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना, जरूरतमंदों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराना तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाना रहा। शिविर के माध्यम से आम नागरिकों को उनके विधिक अधिकारों, सरकारी योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा एवं विधिक सहायता सुविधाओं के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रोंगन मुखोपाध्याय सहित अन्य न्यायाधीशगण एवं न्यायिक पदाधिकारी उपस्थित रहे। मुख्य न्यायाधीश की धर्मपत्नी श्रीमती सविता वशिष्ठ भी कार्यक्रम में मौजूद रहीं। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन न्यायमूर्ति रोंगन मुखोपाध्याय ने किया।



