
Jamshedpur: जमशेदपुर के जाने मने युवा बिजनेसमैन कैरव गांधी (24) के अपहरण की पूरी कहानी अब सामने आई है। इस हाई प्रोफाइल अपहरण कांड की कहानी के तार कोई सामान्य किडनैपिंग नहीं; बल्कि पंजाब, झारखंड, बिहार और इंडोनेशिया तक फैले एक संगठित अपराध गिरोह की सुनियोजित साजिश थी। इस पूरे अपहरण का मास्टरमाइंड इंडोनेशिया में बैठकर मॉनिटरिंग कर रहा था।

जानकारी के अनुसार, कैरव गांधी के अपहरण के लिए दिसंबर महीने से ही प्लानिंग की जा रही थी। कैरव गांधी के अपहरण का मास्टरमाइंड लुधियाना निवासी तेजिंदर पाल सिंह उर्फ सरदार जी है। चौंकाने वाली बात यह है कि फिरौती के लिए 10 करोड़ रुपए की कॉल इंडोनेशिया से की गई थी। जिस स्कॉर्पियो से कैरव गांधी को उठाया गया था, उसे OLX पर खरीदा गया था।

इस मामले में गिरफ्तार आरोपी नालंदा के इस्लामपुर निवासी मो. इमरान उर्फ आमिर के पुलिस को दिए अपराध स्वीकारोक्ति बयान में पूरी साजिश का खुलासा किया।
अपहरणकांड के ग्राउंड एग्जीक्यूटर मो. इमरान का बयान:
मो. इमरान ने अपने बयान में कहा कि मेरी पढ़ाई नालंदा के इस्लामपुर स्थित सिरहारी गांव के एक स्कूल से शुरू हुई। 2001 में मैट्रिक में फेल हुआ, तो पढ़ाई छूट गई। पहले गांव में रहकर खेती की। फिर कपड़े और किराने की दुकान चलाने लगा। करीब दो साल पहले साद आलम के जरिए लुधियाना के सरदारजी से संपर्क हुआ। शुरुआत में काम के सिलसिले में फोन पर बातचीत होती थी, लेकिन धीरे-धीरे हमारी दोस्ती हो गई और आपसी समझदारी बढ़ती चली गई।
करीब डेढ़ साल पहले मैं सरदारजी के कहने पर सलमान खान के साथ उनके लुधियाना स्थित घर गया था। सरदारजी अक्सर राजगीर, बोधगया और पटना आते-जाते रहे। इन दौरों के दौरान हम लोग साथ में पार्टियां करते थे, जिसका सारा खर्च सरदारजी ही उठाते थे।
करीब 7 महीने पहले साद आलम के जरिए पता चला कि सरदारजी जमशेदपुर के एक व्यक्ति के अपहरण और फिरौती की योजना बना रहे हैं। इसके बाद फोन पर बातचीत के दौरान सरदारजी ने मुझसे साफ तौर पर कहा- जमशेदपुर से एक व्यक्ति का अपहरण करना है। इसके लिए भरोसेमंद लोगों को जोड़कर तैयारी करनी होगी। उन्होंने भरोसा दिया- फिरौती की रकम सबके बीच बांटी जाएगी। फिरौती इतनी मिलेगी कि सबकी पुश्तें तर जाएगी। खर्च के लिए पहले ही एडवांस पैसा दिया जाएगा।
इसके बाद मैंने अपने गांव पहाड़ीतर के परिचित गुड्डू सिंह से संपर्क किया। गुड्डू सिंह ने अपने भरोसेमंद साथी उपेंद्र सिंह और अर्जुन सिंह को शामिल किया। बाद में उपेंद्र सिंह के माध्यम से बोधगया निवासी रुपेश पासवान को जोड़ा गया, जिसके यहां अपहृत व्यक्ति को रखने का प्लान था।
इसके बाद मैं गुड्डू सिंह के साथ कई बार जमशेदपुर आया और बाहरी इलाकों में किराये के कमरे की तलाश की। इस दौरान पुलिस गतिविधियों पर नजर रखी और वैकल्पिक रास्ते तय किए।
दिसंबर-2025 में सरदारजी ने छोटे हथियार-गोलियों की व्यवस्था, पुरानी स्कॉर्पियो खरीदने और 10-15 दिन तक बंधक रखने की पूरी तैयारी को कहा। साद आलम के जरिए गाड़ी खरीदने के लिए 4 लाख रुपए और गुड्डू सिंह के ग्रुप को देने के लिए 1.5 लाख रुपए का नया स्मार्टफोन और सिम दिया गया।
कुछ दिन बाद साद आलम और सरदारजी इंडोनेशिया चले गए। 2 जनवरी 2026 को ओएलएक्स पर पटना निवासी मोहन कुमार प्रसाद की सफेद रंग की स्कॉर्पियो (बीआर01पीबी-1062) देखी। 3 जनवरी और 5 जनवरी को पटना में मुलाकात के बाद 4 लाख में गाड़ी की डील हुई। एक लाख रुपए एडवांस देकर स्कॉर्पियो को हैंडओवर ले लिया।
12 जनवरी को राजगीर में मैंने गुड्डू सिंह को 1.5 लाख रुपए देकर अपने लोगों को तैयार रहने को कहा। साथ ही स्मार्टफोन और सिम भी सौंपा। स्कॉर्पियो चलाने के लिए मैंने अपने गांव के रमीज रजा को मोटी रकम का लालच देकर तैयार कर लिया। गुड्डू सिंह के थैले में दो कट्टा और चार जिंदा गोली लेकर आया और स्कॉर्पियो में रख दिया।
दोपहर करीब 3.30 बजे रमेश राजा और सरदारजी के एक आदमी के साथ स्कॉर्पियो से जमशेदपुर के लिए रवाना हुआ। रात करीब 11.30 बजे हम रांची से बाहर एक आलीशान होटल में रुके। 13 जनवरी को सुबह करीब 7.30 बजे होटल से जमशेदपुर के लिए निकले।
ऐसे हुआ कैरव गांधी का अपहरण
जमशेदपुर पहुंचने से पहले सरदारजी ने फोन कर चांडिल टोल प्लाजा के पास रुकने को कहा। वहां फॉर्च्यूनर (जेएच05डीएन-1231) से सरदारजी के चार आदमी पहुंचे। सभी भगड़ी वाले सरदार थे। उनमें तीन पुलिस की वर्दी में थे। वहां स्कॉर्पियो पर नंबर प्लेट (जेएच12ए-4499) लगाया गया। साथ ही पुलिस का स्टीकर और फॉर्च्यूनर पर लगी लाल-नीली फ्लैशर लाइट लगा दी।
फिर दो सरदार स्कॉर्पियो में बैठ गए। जमशेदपुर जाते समय मैंने एक कट्टा और दो गोली अपने पास रखी। एक कट्टा और दो गोली रमीज को दे दी। सुबह करीब 11.40 बजे हम सभी स्कॉर्पियो से कदमा-सोनारी लिंक रोड पहुंचे। 30 मिनट तक इलाके में घूमते रहे, ताकि किसी को शक न हो।
इसके बाद रमीज को अपहरण और भागने का पूरा प्लान समझाया। दोपहर करीब 12.15 बजे सफेद-काली क्रेटा कार आती दिखाई दी। पुलिस वर्दी वालों ने कार रुकवाई और हथियार के बल पर कैरव को स्कॉर्पियो में बैठा लिया।
कैरव को लेकर हम सर्किट हाउस की ओर बढ़े और एक सरदार क्रेटा लेकर दूसरे रास्ते से फरार हो गया। मैंने रास्ते में हथियार का डर दिखाकर केरल को चुप रखा। साईं मंदिर के पास मैंने दोनों हथियार-गोलियां झाड़ियों में फेंक दी।
अपहरण के बाद सुनसान जगह पर स्कॉर्पियो पर पुरानी प्लेट लगाई। कैरव को फॉर्च्यूनर में बैठाया गया। इस दौरान क्रेटा लेकर भागा सरदार भी ऑटो से वहां पहुंच गया। पुलिस से बचने के लिए कैरव को फॉर्च्यूनर से बिहार की ओर ले जाया गया, जबकि मैं, रमीज राजा और अन्य आरोपी स्कॉर्पियो से पुरुलिया के रास्ते राजगीर के लिए निकल गए। डोभी पुल पर केरल को रूपेश पासवान की गाड़ी में शिफ्ट कर बोधगया ले जाया गया।
बोधगया से कैरव का वीडियो बनाकर भेजा, फिर की फिरौती की डिमांड
बोधगया में कैरव की वीडियो बनाकर सरदारजी को भेजा गया। सरदारजी ने इंडोनेशिया से फोन कर परिजनों को फिरौती के लिए फोन किया और लगातार दबाव बनाता रहा। लेकिन जैसे-जैसे पुलिस का शिकंजा कसता गया, गिरोह के सदस्य घबराने लगे। 26 जनवरी को सरदारजी ने फोन कर कहा- पुलिस बहुत करीब है। लड़के को कहीं और शिफ्ट करो।
उसी रात में गुड्डू व रूपेश के साथ कैरव को लेकर बरही की ओर निकल पड़ा। रास्ते में पुलिस की हलचल दिखाई दी। पकड़े जाने के डर से हम कैरव को बरही के पास जंगल में छोड़ फरार हो गए।


