
Madhupur Assembly Seat: भाजपा के लिए मधुपुर विधानसभा सीट बड़ी चुनौती मानी जा रही है आपसी सामंजस्य के अभाव में वर्ष 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में यह सीट भाजपा को गंवानी पड़ी थी। पार्टी नेताओं का मानना है कि 2019 में भाजपा मधुपुर में कुछ ही अंतर से हारी थी। 2024 विधानसभा चुनाव में उस अंतर को पाट कर जीत में तब्दील किया जाएगा। लेकिन , इधर पूर्व मंत्री राज पलिवार की नाराजगी को लेकर पार्टी के बड़े नेता अब तक चुप्पी साधे है। राज पलिवार ने टिकट बदलकर पार्टी के किसी समर्पित कार्यकर्ता को देने पर जोर दिया है। दो दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि पार्टी फैसला नहीं लेती तो राज पलिवार खुद फैसला लेगा। अब अल्टीमेटम का समय समाप्त होने वाला है।

मधुपुर विधानसभा का इतिहास

झारखंड गठन के बाद से मधुपुर सीट कभी वर्तमान के सत्तारूढ़ दलों की झोली में रही तो कभी एनडीए गठबंधन के खाते में रही है। वर्ष 2000 में झारखंड मुक्ति मोर्चा के हाजी हुसैन अंसारी मधुपुर से विधायक चुने गए तो वर्ष 2005 में भाजपा के राज पलिवार ने बाजी मारी थी। वर्ष 2009 में फिर झामुमो के हाजी हुसैन अंसारी ने जीत प्राप्त की, लेकिन वर्ष 2014 के आम चुनाव में भाजपा के राज पलिवार फिर मधुपुर से विधायक चुने गए थे।
वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा को फिर मधुपुर से करारी शिकस्त मिली और हाजी हुसैन अंसारी यहां से विधायक बने, लेकिन 2021 के उपचुनाव में हाजी हुसैन अंसारी के आकस्मिक निधन के बाद उनके बेटे हफीजुल हसन ने इस सीट से जीत प्राप्त की। हफीजुल निवर्तमान में झारखंड सरकार में मंत्री रहे।


