
Deoghar: देवघर के प्लास्टिक पार्क और देवीपुर औद्योगिक क्षेत्र की सुध लेने के संबंध में संताल परगना चैम्बर ऑफ काॅमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज, देवघर के अध्यक्ष आलोक मल्लिक और महासचिव प्रमोद छावछरिया ने मुख्यमंत्री -सह- उद्योग मंत्री को देवीपुर औद्योगिक क्षेत्र की वस्तुस्थिति पर एक भावुक पत्र लिखा है।

पत्र में मुख्यमंत्री को बताया है कि देवघर एवं पूरे संताल परगना क्षेत्र में औद्योगिक विकास पर एक तरह से ग्रहण लगा हुआ है। संताल परगना एवं कमोबेश पूरे झारखण्ड में औद्योगिक प्रगति राजनैतिक इच्छाशक्ति में कमी, अधिकारियों की उदासीनता और अव्यावहारिक अड़चनों का शिकार होकर रह गई है।

देवीपुर की वस्तुस्थिति की जानकारी देते हुए बताया गया है कि देवीपुर औद्योगिक क्षेत्र के लिए सितम्बर 2012 में लगभग 414 एकड़ जमीन अधिसूचित हुई थी। इसमें से लगभग 169 एकड़ जमीन एम्स को तथा 93 एकड़ जमीन प्लास्टिक पार्क को स्थानांतरित कर दी गई। लगभग 153 एकड़ जमीन उद्योगों के लिए बची है। 2018-19 में लगभग 100 एकड़ जमीन कुल 77 यूनिट को विधिवत ऑनलाइन प्रक्रिया से उद्यमियों को आवंटित की गई है। अभी भी वहां 52.54 एकड़ जमीन उद्योगों के लिए खाली पड़ी है। विडंबना देखिए औद्योगिक क्षेत्र की जमीन में से 169 एकड़ जमीन पर एम्स खड़ी हो गई है और परिचालन में भी आ गई है। लेकिन उद्योगों के लिए बचे जमीन पर आवंटन होने ओर प्लास्टिक पार्क बनकर तैयार रहने के बावजूद अभी तक वहां एक भी उद्योग नहीं लगे जबकि कम से कम 200 औद्योगिक ईकाईयां यहां लग सकती है।
प्लास्टिक पार्क के बारे में संप चैम्बर के अध्यक्ष आलोक मल्लिक ने हालात बयां किया है कि 93 एकड़ जमीन पर प्लास्टिक पार्क बनकर तैयार है, लेकिन उद्योग लगाने के लिए यहां निवेशकों को जमीन आवंटन करने की प्रक्रिया पूरी करने में विभागीय उदासीनता स्पष्ट परिलक्षित है। 15.6.2021 से 10.7.20121 तक जिडको ने प्लास्टिक पार्क में आवेदन तो लिया, मगर लंबे समय तक कोई कारवाई नहीं की और बाद में 2022 के अंतिम महीनों में उक्त आवंटन नोटिश को रद्द कर फिर से 01.12.2022 से 21.12.2022 तक ऑनलाइन आवेदन लिए गए। इन आवेदनों को भी 6 महीने से अधिकारियों ने ठंडे बस्ते में डालकर रख दिया है। विदित हो कि भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय तथा झारखण्ड सरकार द्वारा मार्च 2018 में पारित यह पार्क मई-जून 2022 में ही पूरी तरह से बनकर तैयार है। देवघर के देवीपुर में स्थित इस प्लास्टिक पार्क में छोटे-बड़े 110 यूनिट लगेंगे। इसके सुगम संचालन हेतु झारखण्ड प्लास्टिक पार्क लिमिटेड की स्थापना हुई है जिसमें उद्योग सचिव को चेयरमेन और विभिन्न विभागों के 5 सचिवों, विद्युत वितरण बोर्ड के चेयरमेन, उद्योग निदेशक और जिडको के एमडीे को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में रखा गया है। इसके बावजूद पूरी तरह से तैयार इस प्लास्टिक पार्क को संचालन में लाने से सरकार पिछड़ रही है। ऐसे में झारखण्ड में उद्योगों की प्रगति की दुर्दशा साफ झलकती है।
चैम्बर के महासचिव प्रमोद छावछरिया ने बताया कि देवीपुर औद्योगिक क्षेत्र में शेष बचे 153 एकड़ जमीन में से लगभग 100 एकड़ जमीन 82 उद्यमियों को 2018-19 में ही आवंटित हुई, लेकिन आज 3 वर्षों बाद भी उद्यमियों को एक भी प्लाॅट पर फिजिकल पोजेशन नहीं मिल पाया। यहां बेवजह राजनीतिक अड़चनों और विभागीय निष्क्रियताओं के कारण उद्योग नहीं लग पाए।
चैम्बर ने चिंता व्यक्त किया है कि ऐसे में हम कैसे यहां औद्योगिक विकास के सपने देखें। अब तो हालात यह है कि हम कहने को विवश हैं – आखिर कब सुध लेगीे सरकार
पत्र के अन्त में चैम्बर ने मुख्यमंत्री जिनके पास उद्योग मंत्री का प्रभार भी है, से अनुरोध किया है कि संताल परगना सहित झारखएड में औद्योगिक विकास के प्रति सरकार उदासीनता खतम कर सुधि ले और देवीपुर औद्योगिक क्षेत्र में आवंटित जमीनों पर उद्यमियों को ड्राइव चलाकर पोजेशन दिलाए। प्लास्टिक पार्क में जमीन आवंटन के लिए आवेदित भूखंडों पर यथाशीघ्र आवंटन की प्रक्रिया पूरी करते हुए 6 महीने के अंदर सभी 110 प्लाॅटों को निवेशकों को आवंटन करना सुनिश्चित करे।


