
रांची

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने कहा है कि केंद्र सरकार वैक्सीन उपलब्ध कराने में सौतेला व्यवहार कर रही है। झामुमो महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने मंगलवार को प्रेसवार्ता में कहा कि केंद्र सरकार वैक्सीन की कालाबाजारी को वैधानिक मान्यता देने में लगी हुई है।उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कोरोना की वैक्सीन 150 रूपये में खरीदती है और राज्यों को 400-600 में खरीदना पड़ता है। इससे वैक्सीन की कालाबजारी जमकर होगी। इसके लिए केंद्र सरकार सीधे जिम्मेदार होगी।

उन्होंने कहा कि एक ही प्रोडक्ट का तीन-चार तरह का रेट नहीं होना चाहिए। इस कोरोना महामारी में झारखण्ड पहले से ही आर्थिक संकट झेल रहा है। ऐसे में केंद्र का यह कदम जनहित में नहीं है। केंद्र झारखण्ड का जीएसटी का पैसा रोके हुई है। ऐसे में झारखण्ड अपने भरोसे कैसे वैक्सीन की खरीदारी कर सकता है। केंद्र सरकार ने वैक्सीन के मद में 35 हजार करोड़ रपये बजट में रखा है, तो फिर केंद्र सरकार वैक्सीन खरीदकर राज्यों को क्यों नहीं दे रही है।
केद्र राज्यों पर वैक्सीन खरीदने का दबाव बना रही है। टीकाकरण के नाम पर केंद्र सरकार झारखण्ड को प्रताड़ित कर रही है। इस कोरोनाकल में कई लोगों की नौकरी चली गई है। रोजगार नहीं है। इसका ठीकरा राज्य सरकार पर दे दिया गया है। भट्टाचार्य ने कहा कि संघीय ढांचा पर जब कोई पॉलिसी बनती है तो राज्यों को और एक्सपर्ट को बुलाया जाता है। लेकिन केंद्र सरकार इसे जरुरी नहीं समझती है। उन्होंने कहा कि वितीय वर्ष में जीडीपी का दर घटकर 7.5 प्रतिशत हो गया है। प्रति व्यक्ति आय नौ हजार रूपये कम हो गई है। 33 प्रतिशत लोगों की नौकरी चली गई है,जिसे मासिक वेतन मिलता था।
उन्होंने कहा कि पीएम केयर फंड का कोई लेखा-जोखा नहीं होता है। इसमें जो वेंटिलेटर आये,उसमे 75 फीसदी खराब ही है। केंद्र सरकार झारखण्ड को बर्बाद करने के लिए अनैतिक तरीके से फैसले ले रही है। इसका पार्टी विरोध करती है। इसके लिए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है।


