मधुपुर।

गर्मी की तपिश बढ़ने के साथ ही मधुपुर का सियासी तापमान बढ़ने लगा है। यहां मुख्य मुकाबला झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के हफीजुल हसन और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के गंगा नारायण सिंह के बीच होने वाला है।

उपचुनाव में कुल 6 प्रत्याशी मैदान में हैं। लेकिन कोई तीसरा कोण फिलहाल इस चुनावी जंग में दिखाई नहीं दे रहा है। यह चुनाव खासा दिलचस्प बन गया है। ये जंग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और सरकार में शामिल सभी दलों बनाम विपक्षी भारतीय जनता पार्टी और आजसू गठबंधन के बीच होना है।

भाजपा चुनाव के मोर्चे पर पूरी तरह डट गई है। भाजपा विधायक दल के नेता सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी सहित पार्टी के एक दर्जन दिग्गज नेता प्रचार अभियान में जुट गए हैं। भाजपा के बड़े नेता मधुपुर सीट की जीत सुनिश्चित करने के लिए अपना डेरा डाल दिए हैं। चुनाव का रोमांच लगातार बढ़ता जा रहा है।
झामुमो के दिग्गज नेता और सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के निधन से खाली सीट पर हो रहे उपचुनाव के लिए उनके पुत्र हफीजुल हसन को सरकार में मंत्री बनाने के साथ झामुमो का उम्मीदवार बनाया गया है।
झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन भी किसी कीमत पर ये सीट गंवाना नहीं चाहेंगे। झामुमो यहां अपनी पूरी ताकत लगाने को तैयार है।
मधुपुर विधानसभा क्षेत्र में किसी एक जाति , समुदाय का दबदबा या प्रभाव नहीं है। लेकिन पिछड़ी जातियां और मुस्लिम अपेक्षाकृत अधिक हैं। इसके अलावा भूमिहार, आदिवासी, ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ की संख्या है।
भाजपा ने इस बार राज पलिवार का टिकट काटकर गंगा नारायण सिंह को उतारा है। जो गत 2019 के चुनाव में आजसू से लड़कर 45600 मत प्राप्त किए थे। टिकट नहीं मिलने से राज पलिवार ने बगावत की बोली तो नहीं बोली है लेकिन उनके समर्थक अंदरखाने खासे नाराज हैं। राज पलिवार का दर्द गाहे-बगाहे सोशल मीडिया पर जरूर उजागर होता है। भाजपा को भीतरघात की आशंका सता रही है। वहीं, भाजपा को यहां जीत हासिल करना बड़ी चुनौती बन गई है।


