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AIIMS के सीनियर डॉक्टर संजय के. राय ने मोदी के बच्चों को वैक्सीन देने वाले फैसले को अनसाइंटिफिक बताया!

संजय राय कह रहे हैं कि बच्चों को वैक्सीन देने में रिस्क ज्यादा है और बेनिफिट कम है. बच्चों के मामले में इंफेक्शन की गंभीरता बहुत कम है और जो डेटा हमारे पास है, उसके मुताबिक 10 लाख आबादी में सिर्फ 2 मौतें दर्ज की गई हैं.

By Girish Malviya

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि हमारा कोरोना टीकाकरण प्रोग्राम पूरी तरह से साइंटिफिक रहा है लेकिन कल उनके इस दावे पर AIIMS के सीनियर डॉक्टर संजय के.राय ने बहुत बड़ा सवाल उठा दिया। उन्होंने मोदी के बच्चों को वैक्सीन देने वाले फैसले को अनसाइंटिफिक यानी गैर-वैज्ञानिक बताया। 
सबसे बड़ी बात जो हमारा मीडिया ठीक से बता नही रहा है वो यह है कि दिल्ली के एम्स में बच्चों की कोरोना वैक्सीन का ट्रायल किया गया उस क्लीनिकल ट्रायल की जिम्मेदारी डॉ संजय राय की ही थी.

बच्चों के लिए कोवेक्सीन के परीक्षण पटना के एम्स, भुवनेश्वर और दिल्ली में किया गया जिसमें कुल 525 बच्चों पर यह ट्रायल किये गए डॉ संजय राय बच्चों पर ‘कोवैक्सीन’ टीके के ट्रायल के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर रहे हैं और आज वही शख्स बच्चों के लिए वैक्सीन की अनुमति देने के निर्णय को अवैज्ञानिक निर्णय बता रहा है तो एक बार जानने की जरूरत है कि वह कहना क्या चाहते हैं.

कल संजय के. राय ने प्रधानमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए ट्वीट किया, “मैं राष्ट्र की नि:स्वार्थ सेवा और सही समय पर सही निर्णय लेने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का बड़ा प्रशंसक हूं. लेकिन मैं बच्चों के टीकाकरण के उनके अवैज्ञानिक निर्णय से पूरी तरह निराश हूं।”

डॉ संजय राय का कहना है कि अभी तक ऐसी कोई स्टडी सामने नहीं आई जो ये साबित कर सके कि वैक्सीन बच्चों के लिए काफी प्रभावी होगी. दरअसल संजय राय कह रहे हैं कि बच्चों को वैक्सीन देने में रिस्क ज्यादा है और बेनिफिट कम है. बच्चों के मामले में इंफेक्शन की गंभीरता बहुत कम है और जो डेटा हमारे पास है, उसके मुताबिक 10 लाख आबादी में सिर्फ 2 मौतें दर्ज की गई हैं.

जबकि वयस्कों के मामले में अतिसंवेदनशील आबादी में कोविड​​​​-19 के कारण मृत्यु दर लगभग 1.5% है, जिसका अर्थ है कि प्रति दस लाख जनसंख्या पर 15,000 मौतें.

इसके अलावा वैक्सीन देने में रिस्क ज्यादा है. टीकाकरण के बाद एडवर्ड इफेक्ट प्रति दस लाख आबादी पर 10 से 15 नोट किये गए हैं. एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड वैक्सीन से खून के थक्के जमने का खतरा 50,000 में एक को रहता है.

क्या इसका एक अर्थ यह नही है कि बच्चों को वैक्सीन देना खतरनाक हो सकता है ?

अमरीका से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 5 से 14 साल के बच्चों में कोविड का खतरा अन्य बीमारियों, जैसे फ्लू, निमोनिया, डूबना, दिल की बीमारी, हत्या, आत्महत्या, सड़क दुर्घटना और कैंसर से भी कम है। इनमें से अंतिम तीन में जान जाने का खतरा कोविड के मुकाबले 10 गुना ज्यादा है।

संजय राय कह रहे हैं कि भारत में हुए सिरॉलॉजिकल सर्वे के अनुसार 70 प्रतिशत बच्चे बाहरी सम्पर्क में पहले ही आ चुके हैं। यानी ज्यादातर बच्चों को वायरस संक्रमण हुआ, लेकिन अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण वे सुरक्षित रहे। जब 70 प्रतिशत बच्चों को कोरोना हो ही चुका है और वे हमें पता चले बिना ही ठीक भी हो गए, तो क्या बाकी के 30 प्रतिशत को वैक्सीन देना जरूरी है? हमें अपने बच्चों को टीका लगाने से पहले उन देशों के आंकड़ों का विश्लेषण करना चाहिए, जहां पहले ही टीकाकरण किया जा चुका है’.
डॉ संजय राय ने बच्चों के वेक्सीनेशन प्रोग्राम पर बहुत बड़े सवाल खड़े कर दिये हैं. इनका जवाब ढूंढना जरूरी है.

(डिस्क्लेमर: उपरोक्त लेख में व्यक्त विचार/विष्लेषण लेखक के निजी है. इसमें शामिल तथ्य/विचार N7india के नहीं है और N7india इसकी कोई जिम्मेवारी नहीं लेता है.)

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