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नई स्टडीः लॉन्ग कोविड मरीजों में रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी दिख रहे 203 तरह के लक्षण

लॉन्ग कोविड (Long Covid) से जूझने वाले मरीजों पर बीमारी के असर को लेकर नई रिसर्च सामने आई है। कोरोना वायरस को लेकर की गई एक अंतरराष्ट्रीय स्टडी (international study) में बताया गया है कि, ऐसे मरीजों में 10 अंगों से जुड़े 200 से ज्यादा लक्षण दिख सकते हैं।

लंदन: लॉन्ग कोविड (Long Covid) से जूझने वाले मरीजों पर बीमारी के असर को लेकर नई रिसर्च सामने आई है। कोरोना वायरस को लेकर की गई एक अंतरराष्ट्रीय स्टडी (international study) में बताया गया है कि, ऐसे मरीजों में 10 अंगों से जुड़े 200 से ज्यादा लक्षण दिख सकते हैं। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद जिन मरीजों में लक्षण दिखते रहे हैं, वैज्ञानिकों ने उन पर स्टडी की। इनमें लॉन्ग कोविड से जूझने वाले 56 देशों के 3,762 मरीजों से बात की गई।

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (University College London) ने अपनी रिसर्च के दौरान कोविड से उबर चुके मरीजों में दिखने वाले 203 में से 66 लक्षणों पर 7 महीने तक नजर रखी। सभी मरीज 18 साल और इससे ज्यादा उम्र के थे और उनसे कोविड से जुड़े 257 सवाल पूछे गए थे।

द गार्जियन में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इस स्टडी में इसका जिक्र भी है कि लॉन्ग कोविड (Long Covid) के मरीजों के शरीर के 10 अंगों की प्रणालियों में में दिक्कत आ सकती है। ये लक्षण किसी भी मरीज में कम से कम 6 महीने तक रह सकते हैं, या फिर उसे इनसे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

मरीजों में थकान, बेचैनी जैसे लक्षण कॉमन

मरीजों में सबसे कॉमन लक्षण थकान, बेचैनी और सोचने-समझने की क्षमता घटना रहे। इसके अलावा कंपकंपी, खुजली, महिलाओं के पीरियड्स में बदलाव, सेक्सुअल डिस्फंक्शन, हार्ट पेल्पिटेशन, यूरिन स्टोर करने वाले ब्लैडर को कंट्रोल न कर पाना, याददाश्त घटना, धुंधला दिखना, डायरिया, कानों में आवाजें सुनाई देना और दाद जैसे लक्षण भी देखे गए हैं।

जानिए लॉन्ग कोविड क्या है?

लॉन्ग कोविड की कोई मेडिकल परिभाषा नहीं है। आसान भाषा में इसका मतलब है शरीर से वायरस जाने के बाद भी कुछ न कुछ लक्षण दिखते रहना। कोविड-19 के जिन मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है, उन्हें महीनों बाद भी समस्याएं हो रही हैं। कोविड-19 से उबरने के बाद भी लक्षणों का लंबे समय तक बने रहना ही लॉन्ग कोविड है।

दिल-सांस के अलावा दूसरी जांचें भी जरूरी

रिसर्चर्स का कहना है अभी कोरोना वायरस को मात देने के बाद मरीजों को दिल और सांस से जुड़ी जांचें कराने को कहा जाता है, लेकिन लॉन्ग कोविड के मामलों में इसके अलावा भी कुछ जांचें कराना चाहिए। इनमें न्यूरोसायकियाट्रिक और न्यूरोलॉजिकल लक्षणों को देखने की जरूरत है। जितनी तरह के लक्षण मरीजों में दिख रहे हैं, वे शरीर के कई अंगों पर बुरा असर डाल सकते हैं। इनके कारणों का पता लगाकर ही मरीजों का सही इलाज किया जा सकता है।

कब तक लक्षण बने रहेंगे, कहना मुश्किल

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की न्यूरोसाइंटिस्ट एथेना अक्रमी कहती हैं कि ऐसे मरीजों में आगे कितनी तरह के लक्षण दिखेंगे, इसकी बहुत कम जानकारी मिल पाई है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि जैसे-जैसे समय बीतता है, लक्षण दिखाई देने शुरू हो जाते हैं। ये कितनी गंभीर होंगे और इनका रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा, इसका पता भी बाद में ही चलता है।

एथेना अकरामी ने बताया कि इंग्लैंड में ज्यादातर पोस्ट-कोविड क्लीनिक्स में सिर्फ फेफड़ों से संबंधित जांच और इलाज हो रहे हैं। ये बात सही है कि बहुत से लोगों को सांस संबंधी दिक्कत हो रही है, लेकिन उनके साथ अन्य समस्याएं भी उत्पन्न हो रही हैं,जिन पर ध्यान देना जरूरी है. हमें हर लॉन्ग कोविड मरीज के सारे लक्षणों की जांच करनी होगी। ताकि उसे संपूर्ण इलाज और सुधार का मौका दिया जा सके।

एथेना अकरामी खुद लॉन्ग कोविड की मरीज हैं. उन्होंने कहा कि संक्रमण से ठीक होने के 16 महीने बाद भी उन्हें कई लक्षण अपने शरीर में दिखते हैं। इसलिए उनका मानना है कि ऐसे लाखों लॉन्ग कोविड मरीज होंगे जो इन लक्षणों के साथ जी रहे हैं। लेकिन उन्हें यह नहीं पता होगा कि उनके शरीर में दिखने वाले ये लक्षण कोविड-19 के संक्रमण के बाद से विकसित हुए हैं या फिर इन लक्षणों का कोरोना से सीधा संबंध है।

एथेना ने कहा कि लॉन्ग कोविड क्लीनिक्स को आपस में एक नेटवर्क बनाने की जरूरत है। ताकि राष्ट्रीय स्तर पर स्क्रीनिंग की जा सके। लॉन्ग कोविड (Long Covid) मरीजों की सही जांच हो और उनका सही इलाज किया जा सके। एथेना अकरामी की यह स्टडी Lancet जर्नल EClinical Medicine में प्रकाशित हुई है।

अभी तक हुई रिसर्च में पता चला है कि लॉन्ग कोविड के मामले में लक्षण 35 हफ्तों के बाद तक दिखना जारी रह सकते हैं। ऐसा होने का खतरा 91.8% तक रहता है। रिसर्च में शामिल हुए 3,762 मरीजों में से 3,608 यानी करीब 96% मरीजों में ऐसे लक्षण 90 दिन के बाद भी दिखते रहे थे। वहीं, 65% मरीज ऐसे भी थे, जिनमें लक्षण 180 दिन तक दिखाई दिए थे।

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