
New Delhi : मध्य पूर्व में चल रहे तनाव को लेकर भारत की राजनीति में भी हलचल तेज है। इस बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर द्वारा भारत की मौजूदा विदेश नीति (India’s Current Foreign Policy) को ‘जिम्मेदार राज्य प्रबंधन’ का उदाहरण बताया गया, जो चर्चा का विषय बना हुआ है। इस पर सत्तारूढ़ बीजेपी ने खुलकर थरूर की तारीफ की है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केशवन ने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संतुलित और सूझबूझ वाली विदेश नीति की सराहना कर रहे हैं, तो यह एक सकारात्मक बदलाव है।

उन्होंने कहा कि यह रुख लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी द्वारा सरकार की अंतहीन आलोचना की तुलना में वास्तव में एक स्वागतयोग्य बदलाव है।
उन्होंने कहा कि यह देखकर अच्छा लगता है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अब राहुल गांधी की आलोचनात्मक राजनीति से हटकर अपनी बात रख रहे हैं। ये बहुत ही स्वागत योग्य है। कांग्रेस में ऐसे लोगों को एलओपी नहीं बनाया जाता है, क्योंकि वे ऐसे लोगों को ज्यादा महत्व नहीं देते।
इस पूरे मामले पर समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव कुमार राय ने दूरी बनाते हुए कहा कि यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है और उसी पार्टी को इस पर टिप्पणी करनी चाहिए। उन्होंने जोड़ा कि उनकी पार्टी एक सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाती है और अनुशासन के दायरे में रहकर काम करती है।
वहीं, बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने इस मुद्दे पर कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय मामलों पर सिर्फ संसद ही नहीं बल्कि विधानसभाओं में भी चर्चा होनी चाहिए। उनका मानना है कि जब गंभीर मुद्दों पर खुलकर बातचीत होती है, तो समाधान भी निकलते हैं और देश व राज्य दोनों को फायदा होता है।
दरअसल, शशि थरूर ने गुरुवार को पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत के रुख को ‘नैतिक आत्मसमर्पण’ के बजाय ‘जिम्मेदार राज्य प्रबंधन’ का उदाहरण बताया। उनका कहना था कि भारत ने इस संवेदनशील मुद्दे पर जिस तरह संतुलन बनाए रखा है, वह काबिले-तारीफ है।
हालांकि उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि ईरान के सुप्रीम लीडर के निधन पर भारत शोक संदेश दे सकता था, जैसा पहले राष्ट्रपति की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत के समय किया गया था। साथ ही, उन्होंने साफ कहा कि टकराव के बजाय चुप्पी साधने के लिए वे सरकार की आलोचना नहीं करेंगे। (IANS)


