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अगले दौर में जल्द ही 8-9 Air Ports को Lease पर दिया जाएगा: सिंधिया

टाटा को सौंपे जाने पर एयर इंडिया के बहीखाते में 62 हजार करोड़ रुपये के भारी कर्ज में से, भारत सरकार ने इसमें शामिल सभी बैंकों का भुगतान करके अपने 47 हजार करोड़ रुपये के हिस्से को क्लॉज कर दिया है।

New Delhi: टाटा को सौंपे जाने पर एयर इंडिया के बहीखाते में 62 हजार करोड़ रुपये के भारी कर्ज में से, भारत सरकार ने इसमें शामिल सभी बैंकों का भुगतान करके अपने 47 हजार करोड़ रुपये के हिस्से को क्लॉज कर दिया है।

टाटा ने इस सौदे के तहत एयरलाइन के ऊपर चढ़े ऋण में से 15,300 करोड़ रुपये का कर्ज उतारा है, जहां से उन्होंने कई शर्तों पर सहमति व्यक्त की और नए उधारदाताओं को शामिल करके इसे पुनर्वित्त (रि-फाइनेंस) किया। नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को आईएएनएस के प्रधान संपादक संदीप बामजई से बातचीत में इसकी पुष्टि की।

सिंधिया ने कहा, “टाटा ने 2,700 करोड़ रुपये नकद चुकाए और एयरलाइन के कर्ज में से 15,300 करोड़ रुपये चुकाए हैं। हमने सभी उधारदाताओं के साथ 47,000 करोड़ रुपये की शेष राशि का निपटान किया है। सौदा अब पूरा हो गया है और मुझे विश्वास है कि यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।”

31 अगस्त, 2021 को, एयरलाइन का कुल कर्ज 61,562 करोड़ रुपये था, जिसमें से लगभग 47,000 करोड़ रुपये एआईएएचएल को हस्तांतरित किए गए। एयरलाइन पर अवैतनिक ईंधन बिलों और अन्य ऑपरेशन लेनदारों के प्रति लगभग 15,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त देनदारी भी थी।

सिंधिया ने कहा कि टाटा भारत के कुल 715 विमानों में से 141 विमानों (एयर इंडिया के बेड़े) के साथ अपनी टर्नअराउंड योजनाओं से बहुत उत्साहित है। उन्होंने माना कि भारत में इस बेड़े का आकार अगले पांच वर्षों के भीतर दोगुना हो जाएगा, क्योंकि जेट एयरवेज (दोबारा वापसी) और अकासा एयर सहित सभी एयरलाइनों की बड़े पैमाने पर रोल आउट योजनाएं हैं। उड्डयन में सुधार के एजेंडे का अनुसरण करते हुए, उनका अगला साहसिक कदम हवाई अड्डों के एक और सेट को पट्टे पर देना है और इस बार आठ से नौ के आसपास एयरपोर्ट्स को पट्टे पर दिया जाएगा।

सिंधिया ने आगे कहा, “हमने जो किया वह एक विशेष प्रयोजन वाहन (स्पेशल पर्पज व्हीकल), एयर इंडिया एसेट होल्डिंग लिमिटेड को 47,000 करोड़ रुपये का हस्तांतरण था। कर्ज और अन्य देनदारियों पर ब्याज सेवा का खर्च बहुत अधिक था और इसे स्थायी रूप से समाप्त करने का निर्णय लिया गया था। सौदे के समय लगभग 61,131 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे।”

विमानन क्षेत्र के लिए विचारों से भरे सिंधिया नई नीतियों के बारे में सोच रहे हैं, जो प्रणाली को अधिक संगठित और समान रूप से अधिक गतिशील बनाती हैं। उदाहरण के लिए, उनके एजेंडे में तत्काल कम से कम 8-9 और हवाई अड्डों को पट्टे पर देना है।

उन्होंने कहा, “मैं स्पष्ट रूप से जोर देकर कहता हूं कि मैंने उस दिन संसद में कहा था कि इन हवाई अड्डों का निजीकरण नहीं किया जा रहा है, इन्हें 50 साल की अवधि के लिए पट्टे पर दिया जा रहा है। न केवल वे इस तरह से सरकार के लिए राजस्व उत्पन्न करने जा रहे हैं, लेकिन वे इन हवाई अड्डों के उन्नयन (अपग्रेडिंग) की गारंटी भी देंगे। मुझे लगता है कि यह आगे बढ़ने वाला सबसे अच्छा मॉडल है। आप जल्द ही अगले दौर में बोली लगाने के बारे में सुनेंगे। निजीकरण के आरोपों पर मैं आपको बता दूं कि पट्टे पर देने से वास्तव में एएआई के लिए छह हवाई अड्डों के पहले दौर के लिए लीज शुल्क के रूप में प्रति वर्ष 904 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा और इस मामले में 2,322 करोड़ रुपये पहले ही सरकारी खातों में पहुंच चुके हैं। जब हम अगले दौर की लीजिंग करेंगे तो हम इसी तरह के अप्रत्याशित लाभ की उम्मीद जरूर करेंगे।”

इसी तरह से वह एटीएफ (विमानन टरबाइन ईंधन) पर वैट कम करने के अपने आह्वान पर मिली प्रतिक्रिया से भी उत्साहित हैं।

इस पर सिंधिया ने कहा, “मैंने मुख्यमंत्रियों से वैट कम करने का अनुरोध किया है और मैंने पाया है कि 12 सीएम और एक एलजी कनेक्टिविटी और राजस्व को बढ़ावा देने के लिए कटौती के साथ आगे आए हैं। आंध्र प्रदेश और केरल ने वैट कम किया है और एक तिमाही में कनेक्टिविटी में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जम्मू-कश्मीर ने वैट को 26 फीसदी से घटाकर 1 फीसदी कर दिया है और वहां उतरने वाले और ईंधन भरने वाले विमानों की संख्या में 360 फीसदी की वृद्धि हुई है। यह सुधार उपाय केवल भारत में विमानन क्षेत्र को और गहरा एवं बड़ा करेगा।”

उनका अगला बड़ा कदम उनकी महत्वाकांक्षी ड्रोन नीति है, जहां उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक तकनीक वाले 16-18 स्वदेशी स्टार्टअप बदलाव की अगुवाई में होंगे।

मंत्री सिंधिया ने कहा, “मंत्रालय में, हम भारत को एक वैश्विक ड्रोन हब बनाने के लिए प्रधानमंत्री के ²ष्टिकोण के साथ तालमेल बिठा रहे हैं। पीएलआई योजना इस क्षेत्र में विनिर्माण और सेवाओं दोनों को चलाएगी। साथ ही कृषि, खनन और ग्रामीण समेत 12 अलग-अलग मंत्रालय इन ड्रोन की मांग पैदा करेंगे। इस क्षेत्र में साफ रास्ता उपलब्ध है और इनमें से कई स्टार्टअप के साथ मेरा इंटरफेस, जो भाग लेना चाहता है, मुझे विश्वास दिलाता है कि हम इस क्षेत्र में एक रचनात्मक पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) का निर्माण करेंगे। ड्रोन उद्योग और भारत सरकार के हितधारकों की सक्रिय भागीदारी के साथ, ड्रोन उद्योग बड़ी वृद्धि के पथ पर अग्रसर है। सरकार ड्रोन नियमों को आसान बनाकर और ड्रोन से जुड़ी समझ के माध्यम से ड्रोन शक्ति और किसान ड्रोन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से इस त्वरित ड्रोन अपनाने की निरंतरता को सक्षम बनाएगी।”

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