
New Delhi: आवारा मवेशियों (stray cattle) के रेलवे ट्रैक (Railway Track) पर आने और एक्सीडेंट (Accident) जैसी अन्य चुनौतियों से पार पाने के लिए रेल मंत्रालय (Rail Ministry) ने कई अहम कदम (important step) उठाए। दरअसल देश में पिछले 6 सालों में आवारा मवेशियों के रेलवे ट्रैक पर आने के मामले चौगुना से भी ज्यादा बढ़ गए हैं। केवल राजनीतिक दलों के लिए ही नहीं, अब रेलवे के लिए भी ये बेहद अहम बनता जा रहा है। इसलिये रेलवे ट्रैक पर पशुओं की मृत्यु को कम करने के लिए क्षेत्रीय रेलवे द्वारा कई निवारक उपाय किए गए हैं।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार मवेशियों व जानवरों के भागने की संभावना वाले स्थानों पर लगातार सीटी बजाने के लिए नियमित आधार पर ट्रेन चालक दल को संवेदनशील बनाया गया।

मवेशियों द्वारा अतिचार के चिन्हित स्थानों और प्रमुख शहरों के रास्ते पर बाड़ व चारदीवारी का निर्माण किया गया। गावों में सुरक्षा संगोष्ठी व प्रचार के माध्यम से मवेशियों को ट्रैक के नजदीक आने से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए ग्रामीणों को परामर्श दिया गया।
वहीं वन क्षेत्रों से गुजरने वाली रेलवे लाइनों पर चिन्हित संवेदनशील स्थानों में उपयुक्त गति प्रतिबंध लगाया गया। हाथी और अन्य जानवरों की उपस्थिति के बारे में ट्रेन चालकों को सचेत करने के लिए उपयुक्त स्थानों पर साइनेज बोर्ड लगाया जा रहा है।
उन स्थानों पर अभिनव हनी बी साउंड सिस्टम की स्थापना, जो हाथियों को पार करने की संभावना रखते हैं। क्षेत्र के वन अधिकारियों के परामर्श से चिन्हित स्थानों पर वन्य जीवों की आवाजाही के लिए अंडरपास और रैम्प का निर्माण भी किया गया।



