

नई दिल्ली।

बांग्लादेश को आजाद हुए आधी सदी हो गई और पाकिस्तान से स्वतंत्र होने के 50 साल पूरे होने के खास मौके पर होने वाले समारोहों में, इस माह के आखिर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) और नेपाल, श्रीलंका, भूटान और मालदीव की सरकारों के प्रमुखों सहित विश्व के कई नेता हिस्सा लेंगे। वर्ष-1971 में बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के बाद पाकिस्तान से देश को आजादी मिलने की 50वीं वर्षगांठ पर 17 से 27 मार्च तक विभिन्न समारोहों का आयोजन किया जाना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांग्लादेश के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल होंगे। वे आगामी 26 और 27 मार्च को बांग्लादेश के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह वहां बने भारतीय मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना भी करेंगे। पीएम मोदी के इस कार्यक्रम को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

बांग्लादेश में रहकर बंगाल चुनाव पर रहेगी नजर
रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम नरेंद्र मोदी 26 मार्च को ढाका जाएंगे. वहीं, 27 मार्च को सतखिरा और गोपालगंज के ओरकंडी में स्थित हिन्दू मंदिरों का भी दौरा करेंगे। वह वहां जाकर पूजा अर्चना करेंगे। साथ ही एक कार्यक्रम में शामिल होंगे. बांग्लादेश की धरती से पीएम मोदी का हर संदेश सीधे पश्चिम बंगाल भी पहुंचेगा, जहां 27 मार्च को पहले चरण के लिए 30 सीटों पर मतदान होना है। वहीं असम में भी इसी दिन पहले फेज में 47 सीटों पर चुनाव होना है। इसीलिए पीएम मोदी के बांग्लादेश दौरे को बंगाल चुनाव से भी जोड़ कर देखा जा रहा है।
मतुआ समुदाय के लोगों से PM करेंगे मुलाकात
बांग्लादेश की आजादी से पहले अत्याचार से परेशान होकर बड़ी आबादी ने पश्चिम बंगाल का रुख किया था, जिसमें मतुआ समुदाय भी शामिल है। ऐसा माना जा रहा है कि पीएम के दौरे से अप्रत्यक्ष रूप से बंगाल में सत्ता की कुंजी कहे जाने वाले मतुआ समाज को साधने की कोशिश होगी। पश्चिम बंगाल में मतुआ समाज की अच्छी ताकत है। साल 1947 के बाद मतुआ समुदाय पश्चिम बंगाल के तीन जिलों नॉर्थ 24 परगना, साउथ 24 परगना और नदिया में आकर बसा। बंगाल की 294 में से सिर्फ 21 सीटों पर मतुआ वोटर प्रभाव डालते हैं। 21 सीटों पर भले मतुआ आबादी करीब सोलह फीसदी हो लेकिन मतुआ समाज हमेशा से किंग मेकर की भूमिका में रहा है।
मनाई जायेगी 50वीं वर्षगांठ और राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की जन्म शताब्दी
आजादी की 50वीं वर्षगांठ और राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की जन्म शताब्दी साथ-साथ मनाई जायेगी। बांग्लादेश सरकार के प्रधान सूचना अधिकारी सुरथ कुमार सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और नेपाल, श्रीलंका, भूटान और मालदीव के प्रमुख अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल होने वाले विशिष्ट विदेशी मेहमानों में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर 26 मार्च को आएंगे और मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होंगे। यह मौका बांग्लादेश-भारत के राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे होने का भी होगा।
मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह 17 मार्च को तीन दिवसीय दौरे पर आने वाले पहले शीर्ष विदेशी गणमान्य अतिथि होंगे। इसके बाद श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे हैं जो 19 मार्च को दो दिवसीय दौरे पर ढाका आएंगे। नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी 22 मार्च से दो दिवसीय दौरे पर ढाका में रहेंगी, जबकि भूटानी प्रधानमंत्री लोताय त्शेरिंग 24 मार्च से 25 मार्च तक देश में रहेंगे। सरकार ने बताया कि विदेशी गणमान्य अतिथि राष्ट्रपिता की जन्म शताब्दी के मौके पर बंगबंधु संग्रहालय भी जाएंगे। बांग्लादेश ने स्वतंत्रता के 50 साल पूरे होने और बंगबंधु की जन्मशताब्दी के मौके पर भव्य समारोहों के आयोजन की योजना बनाई गयी थी लेकिन कोरोना वायरस महामारी के कारण उसे अपनी योजना में बदलाव करना पड़ा।



