

नई दिल्ली।

Budget 2021: कोरोना संकट के बीच केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को आम बजट 2021-22 पेश किया. कोरोना की वजह से चरमरा चुकी अर्थव्यवस्था को बूस्ट करने के लिए कई कदम उठाये गये हैं। मोदी सरकार ने शराब, मसूर की दाल, काबुली चना और मटर जैसे उत्पादों पर कृषि विकास सेस लगाने का एलान किया है।

आइए जानते हैं कि आज की बजट घोषणा से आम लोगों के जीवन पर क्या असर पड़ेगा यानी इस बजट के बाद कौन सी चीजें सस्ती और क्या महंगी हो जाएगी:-
शराब पीना होगा महंगा
वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि नया कृषि विकास सेस कल से ही लागू हो जाएगा। इस हिसाब से कल से शराब पीना भी महंगा होगा। क्योंकि इस बार बजट में मादक पेय पर 100 प्रतिशत कृषि सेस लगाया है।
पेट्रोल-डीजल भी महंगे
इसके साथ ही बजट में पेट्रोल पर 2.5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 4 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से कृषि सेस लगाया गया है। ऐसे में इनकी कीमत कल से ही बढ़ने की संभावना है।
मोबाइल, रेफ्रिजरेटर और चार्जर भी महंगे
सरकार ने मोबाइल फोन के पुर्जों और चार्जर पर आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला किया है। स्थानीय मूल्यवर्धन को बढ़ाने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। इससे मोबाइल फोन महंगे हो सकते हैं।
♦ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट पेश करते हुए सीमा शुल्कों में 400 रियायतों की समीक्षा की घोषणा की। इनमें मोबाइल उपकरण भी शामिल है।
सेब, खाद, चमड़ा भी महंगा
सरकार ने चमड़ा पर सीमा शुल्क को 10% कर दिया है। मालूम हो कि पहले यह शून्य था. वहीं सेब पर 35% और खाद पर 5% का कृषि सेस लगाया है।
सूती कपड़े महंगे
सरकार ने कपास पर सीमा शुल्क को शून्य से बढ़ाकर 5% और कच्चे रेशम पर 10% से 15% कर दिया है। ऐसे में सूती कपड़े महंगे होंगे। हालांकि नायलॉन के धागे पर उत्पाद शुल्क 7.5% से घटकर 5% रह गया है।
सस्ता हो सकता है सोना-चांदी
वित्त मंत्री ने अपने बजट प्रस्तावों में सोने और चांदी पर आयात शुल्क में भारी कटौती की घोषणा की है। वित्त मंत्री ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क में 5 फीसदी की कटौती की है। मालूम हो कि वर्तमान में सोने पर 12.5 फीसदी आयात शुल्क चुकाना पड़ता है। इस तरह से अब सोने और चांदी पर सिर्फ 7.5 फीसदी आयात शुल्क चुकानी होगी।
खाने के तेल पर सेस, लेकिन नहीं होगा महंगाई का असर
बजट में कच्चे तेल पर 17.5% कृषि सेस, कच्चे सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर 20% का सेस लगाया है। लेकिन ग्राहकों पर इससे कीमतों का अतिरिक्त भार ना पड़े इसके लिए इन पर बेसिक सीमा शुल्क (बीसीडी) में कटौती की गई है।



