

नई दिल्ली।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में युवाओं और रोजगार से जुड़े बड़े फैसले पर मुहर लगा दी गई है. अब गैर-राजपत्रित पदों पर भर्ती के लिए एजेंसी सामान्य पात्रता परीक्षा आयोजित करेगी. फैसले के तहत कैबिनेट ने केंद्र सरकार की नौकरियों के लिए एक ही टेस्ट की व्यवस्था को मंजूरी दे दी है. इसके लिए नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी स्थापित करने के प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हरी झंडी दिखा दी है. अब ये एजेंसी केंद्र सरकार के नॉन-गैजेटेड पदों पर भर्तियों के लिए कॉमन एलिजीबिलिटी टेस्ट कराएगी.

राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी को पहली बार यूनियन बजट 2020 में सरकार द्वारा प्रस्तावित किया गया था. एजेंसी एक स्वतंत्र, पेशेवर, विशेषज्ञ संगठन होगी और एक परीक्षा आयोजित करेगी, जिसे सरकार में चयन के लिए सामान्य पात्रता परीक्षा के रूप में जाना जाएगा.
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह सरकारी नौकरी ढूंढ रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है. एनआरए की स्थापना के बाद केंद्र सरकार की नौकरियों के लिए अलग-अलग परीक्षाओं में बैठने वाले युवाओं को सिर्फ एक ही टेस्ट देना होगा. जावड़ेकर ने कहा कि नौकरी के लिए युवाओं को बहुत परीक्षाएं देनी पड़ती हैं. इस समय 20 भर्ती एजेंसियां हैं. ऐसे में युवाओं को हर एजेंसी के लिए परीक्षा देने के लिए कई जगह जाना पड़ता है. अब नेशनल रिक्रूटमेंट एंजेसी कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट लेगी और उन्हें हर एजेंसी के लिए अलग परीक्षा देने से निजात मिलेगी.
मंत्री जावड़ेकर ने कहा कि एनआरए से करोड़ों युवाओं को सीधा फायदा मिलेगा. युवाओं की तरफ से यह मांग कई साल से उठ रही थी. अब एनआरए की स्थापना से उनका पैसा भी बचेगा और मानसिक परेशानी भी दूर रहेगी. उन्हें एक ही परीक्षा से आगे जाने का मौका मिलेगा. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह ऐतिहासिक सुधार है. इससे भर्ती, चयन, नौकरी में और जीवन में आसानी होगी. केंद्र सरकार के सचिव सी. चंद्रमौली ने कहा कि फिलहाल हम तीन एजेंसियों की परीक्षाओं को कॉमन कर रहे हैं. इनमें बैंक में भर्ती के लिए आईबीपीएस, रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड और स्टाफ सिलेक्शन कमीशन शामिल हैं.
बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2020-21 में सरकारी नौकरियों के लिए एनआरए बनाने के प्रस्ताव की घोषणा की थी. यह कंप्यूटर बेस्ड ऑनलाइन परीक्षा होगी. हर जिले में इसके लिए एक सेंटर बनेगा. सीईटी मेरिट लिस्ट तीन साल के लिए मान्य रहेगी. वर्तमान में, भर्ती परीक्षा यूपीएससी और एसएससी जैसे संगठनों के विवेक के तहत आयोजित की जाती है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस एकल एकीकृत भर्ती एजेंसी के गठन का प्रस्ताव करते हुए लोकसभा में कहा था, "यह युवाओं के समय, प्रयास और लागत पर बहुत अधिक बोझ डालता है."




