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Byju’s का मुश्किल दौर: लिटमस टेस्ट से गुजर रहा Byju’s

बायजु के विस्तार की सारी योजनायें ठंडे बस्ते में चली गयी हैं और वह कई कंपनियों का अधिग्रहण करके अपना पोर्टफोलियो बढ़ा रहा है और वह अब ऑनलाइन क्लासेज भी शुरू कर चुका है।

By: निशांत अरोड़ा

New Delhi: देश की दिग्गज एडुटेक कंपनी बायजु (Edutech Company Byju’s) से मिला जॉब ऑफर 24 साल के विप्लव के लिये सपनों के साकार होने जैसा था। वह अपने चार-पांच दोस्तों के साथ गत फरवरी में कंपनी में बतौर बिजनेस डेवलमेंट (सेल्स) ट्रेनी काम करने लगा। विपल्व से कंपनी ने वादा किया कि उसे प्रशिक्षण के दौरान 15,000 रुपये मिलेंगे और छह सप्ताह के बाद जब उसका प्रशिक्षण समाप्त हो जायेगा तो उसे 45,000 रुपये का वेतन दिया जाने लगा। उसे यह कहा गया कि वह अपनी पसंदीदा लोकेशन से कंपनी के लिये काम कर सकता है। विप्लव के लिये उसकी पसंदीदा लोकेशन आगरा या नोएडा थी, जहां उसके रिश्तेदार रहते हैं।

विप्लव ने न्यूज़ एजेंसी आईएएनएस को बताया कि कंपनी ने लेकिन एक भी वादा पूरा नहीं किया और उसे मात्र 25,000 के वेतन पर लखनऊ जाने के लिये कहा गया। उसने कहा कि उसके बाद उसके पास कंपनी छोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं था क्योंकि 25 हजार रुपये में लखनऊ में जिंदगी गुजारना नामुमकिन है। उसके सभी दोस्तों ने भी कंपनी छोड़ दी।

यह समस्या सिर्फ विप्लव की नहीं है बल्कि बायजु खुद भी अपने अस्तित्व को बचाने के मुश्किल दौर से गुजर रहा है। भारत में कंपनियां अब हाइब्रिड मॉडल में काम कर रही हैं और स्कूल तथा कॉलेज भी खुल गये हैं, ऐसी स्थिति में बायजु को खुद को बाजार में बनाये रखने के लिये काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।

बायजु के विस्तार की सारी योजनायें ठंडे बस्ते में चली गयी हैं और वह कई कंपनियों का अधिग्रहण करके अपना पोर्टफोलियो बढ़ा रहा है और वह अब ऑनलाइन क्लासेज भी शुरू कर चुका है। विश्वस्त सूत्रों ने आईएनएस को बताया कि बायजु वैश्विक स्तर पर जो विस्तार करना चाहता था, वह अब तक उस लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाया है।

बायजु को सर्वाधिक घाटा कोडिंग प्लेटफॉर्म व्हाइटहैट जूनियर के कारण उठाना पड़ रहा है। बायजु ने जुलाई 2020 में 30 करोड़ डॉलर में इसका अधिग्रहण किया था। वित्त वर्ष 21 में व्हाइटहैट जूनियर को 1,690 करोड़ रुपये भारी नुकसान उठाना पड़ा था जबकि उसका राजस्व मात्र 484 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी का व्यय जो वित्त वर्ष 69.7 करोड़ रुपये था, वह वित्त वर्ष 21 में कई गुणा बढ़कर 2,175 करोड़ रुपये पर पहुंच गया था। कंपनी ने आस्ट्रेलिया के बाजार से 12.34 करोड़ रुपये और ब्रिटेन के बाजार से 11.07 करोड़ रुपये अर्जित किये थे।

सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि व्हाइटहैट जूनियर ने अपने पांच हजार कर्मचारियों में से करीब तीन हजार कर्मचारियों को 18 अप्रैल से मुम्बई या गुरुग्राम रिपोर्ट करने के लिये कहा है। इसमें वे शिक्षक भी शामिल हैं, जो उसके साथ संविदा के तहत जुड़े हैं। कंपनी के प्रवक्ता ने भी इसकी पुष्टि करते हुये कहा कि कुछ शिक्षक वर्क फ्रॉम होम जारी रखेंगे। कुछ कर्मचारी हो सकता है रिपोर्ट न करना चाहें तो वे इसे लेकर एचआर से संपर्क कर सकते हैं।

ऐसा नहीं है कि व्हाइटहैट जूनियर ने अपना दायरा बढ़ाकर नुकसान की भरपाई की कोशिश नहीं की लेकिन उसकी यह कोशिश घाटे को और बढ़ाने वाली ही साबित हुई। व्हाइटहैट जूनियर ने ऑनलाइट गिटार और पियोनो सीखाना शुरू किया लेकिन इसके भी कुछ अच्छे परिणाम अब तक सामने नहीं आये हैं।

बायजु ने बदलते माहौल को देखकर 80 ट्यूशन सेंटर खोले हैं और उसकी योजना इस साल के अंत तक देश के 200 शहरों में 500 सेंटर खोलने की है। अपनी विस्तार नीति के तहत बायजु लगातार अधिग्रहण करता रहता है। उसने आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड, ग्रेट लर्निग, जुलाई 2021 में 50 करोड़ डॉलर में एपिक, जनवरी 2019 में 12 करोड़ डॉलर में अमेरिका स्थित ऑस्मो, जुलाई 2017 में ट्यूटरविस्ता और एडुराइट का अधिग्रहण किया है।

बायजु का कहना है कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों को मिलाकर ही शिक्षा का भविष्य निर्धारित होगा। कंपनी के प्रवक्त ने कहा कि बायजु के उत्पाद वैश्विक होने के साथ ही हर देश की मांग के अनुसार और हर छात्र की जरूरतों के अनुसार ढले हुये हैं।

बायजु के इन प्रयासों के बावजूद वह बाजार की मौजूद परिस्थितियों से अप्रभावित नहीं है। कंपनी के सीईओ एवं संस्थापक बायजु रवींद्रन ने कथित रूप से कपनी में 40 करोड़ डॉलर का निवेश किया है।

किसी स्टार्टअप के लिये यह अनूठी बात है कि वह आईपीओ की तैयारी कर रहा है और उसका संस्थापक उसमें निवेश कर रहा है। भारत में शिक्षा क्षेत्र के स्टार्टअप के लिये यह बुरा दौर है और कई स्टार्टअप को भारी संख्या में अपने कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ रही है।

अनएकेडमी ने करीब 600 कर्मचारियों की छंटनी की है जबकि स्टार्टअप लीडो लर्निग को अपना शटर की बंद करना पड़ा। रोनी स्क्रूवाला का यह स्टार्टअप फरवरी में बंद हो गया और इसके एक हजार कर्मचारियों को नये सिरे से नौकरी की तलाश में निकलना पड़ा। (IANS)

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