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कैट ने किया जीएसटीआर रिटर्न की तारीख बढ़ाने और पैकेज देने की मांग

कैट ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण व राज्यों के वित्त मंत्रियों को एक पत्र भेजकर जीएसटी नियमों के तहत लगने वाले विलंब शुल्क को खत्म करने के साथ वित्तीय पैकेज देने की भी मांग की है।

नई दिल्ली

जीएसटी काउंसिल की बैठक से पूर्व कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने जीएसटीआर रिटर्न दाखिल करने की तारीख 31 अगस्त तक बढ़ाने की मांग की है। कैट ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एवं सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों को एक पत्र भेजकर जीएसटी नियमों के तहत लगने वाले विलंब शुल्क को खत्म करने के साथ वित्तीय पैकेज देने की भी मांग की है। 

कारोबारी संगठन ने जारी बयान में कहा है कि कोविड-19 महामारी और ब्लैक फंगस के इलाज़ के लिए जरूरी सभी चिकित्सा उपकरणों पर जीएसटी की दर को जीएसटी काउंसिल कम करे। कैट ने काउंसिल से व्यापारियों के लिए वित्तीय पैकेज के साथ-साथ बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से कारोबार के लिए लिये गए कर्ज पर 6 महीने की मोहलत देने की मांग की है। 

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि वित्त मंत्री को भेजे गए पत्र में कहा है कि कोरोना ने देशभर में व्यावसायिक गतिविधियों को बाधित और तबाह कर दिया है। ऐसे में जब व्यापारी पिछले लॉकडाउन से आए संकट से उबरने की कोशिश कर रहे थे, उसी वक्त संक्रमण की दूसरी लहर आने और एक बार फिर लागू लॉकडाउन से व्यापारियों को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में एक विस्तृत ज्ञापन में जीएसटी से संबंधित अनेक विषयों पर उनका ध्यान आकृष्ट कराया है। 

खंडेलवाल ने जीएसटी काउंसिल की 43वीं बैठक की पूर्व संध्या पर कहा कि जीएसटी रिटर्न दाखिल करने के लिए विलंब शुल्क और देर से टैक्स जमा करने पर ब्याज को माफ किया जाना चाहिए। साथ ही जीएसटी रिटर्न के स्थान पर चालान को टैक्स के भुगतान का आधार बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा इस वक्त किसी भी कारोबारी और व्यापारी का पंजीकरण रद्द नहीं करने का अनुरोध किया है, जब ऐसा करना जरूरी न हो। 

कैट महामंत्री ने निर्मला सीतारमण से आग्रह किया है कि सरकार बैंकों को ईएमआई और ब्याज आदि के भुगतान के लिए 6 महीने की अवधि का एक मोरोटोरियम का ऐलान करने का निर्देश दे। खंडेलवाल ने कहा कि हमें केंद्र और राज्य सरकारों से ऐसी वित्तीय सुविधाओं की मांग करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि पिछले साल लॉकडाउन के दौरान जारी राहत पैकेज में व्यापारियों को एक रुपया भी नहीं दिया गया था।

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