
Patna: 21 अगस्त को बी. एड. विभाग ए. एन. कॉलेज में सत्र 23 – 25 के छात्राध्यापकों ने भारत की शिक्षा-व्यवस्था के ऐतिहासिक पक्ष पर सेमिनार आयोजित किया। कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत गान से हुआ।

कुल 6 छात्राध्यापकों ने इस विषय पर अपने विचार रखे। विषय-वस्तु में छात्राध्यापकों ने वैदिककालीन शिक्षा से लेकर वर्तमान शिक्षा-व्यवस्था पर चर्चा की। नीरज ने शिक्षा के विकास पर चर्चा की। शाम्भवी ने शिक्षा के विकास में परिवर्तन पर विचार रखे। रूपेश ने विस्तार से शिक्षा के सभी कालों का वर्णन करते हुए नई शिक्षा नीति के मूल्यपरक पक्ष को सामने रखा। रवि ने शिक्षा-व्यवस्था के कमजोर कड़ी पर ध्यानाकर्षण करवाते हुए अपनी बातें कहीं। कंचन ने कोठारी आयोग की चर्चा करते हुए सभी वर्ग को समान शिक्षा की बात कही। ऋषि ने भारतीय शिक्षा के इतिहास को विस्तार से बताया ।

विषय-प्रवेश शबरीन ने किया। शबरीन ने क्रमबद्ध ढंग से विषय के बिंदुओं को स्पष्ट किया।
अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए विभागाध्यक्ष डॉ रीता सिंह ने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी नैतिकता आधारित शिक्षा रही है। हर काल में भारतीय शिक्षा में मूल्य को महत्त्वपूर्ण माना गया और बच्चों के संपूर्ण व्यक्तित्व के विकास को शिक्षा का मूल उद्देश्य रखा गया। हम शिक्षण-शिक्षा से जुड़े हुए हैं, हमारा कर्तव्य है कि हम अपने शिक्षा-व्यवस्था के मूल उद्देश्य को साथ लेकर चलें। विभागीय शिक्षक डॉ. सन्तोष कुमार विश्वकर्मा ने समझाया कि यह शिक्षा शताब्दियों की यात्रा है। यह मन की बगिया को विकसित करने का क्षेत्र है।
कार्यक्रम का संचालन जाह्नवी ने किया। कार्यक्रम में विभागीय शिक्षक रमन कुमार, राजेश कुमार रंजन ने अपने मूल्यवान विचारों से लाभान्वित किया।


