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2014 के बाद अपराध और अपराधियों को लेकर सरकार कभी गंभीर नहीं रही है…

By: Santosh Singh

Patna: बिहार पुलिस भले ही बेगूसराय की घटना को किसी सिरफिरे का कार्य बता रही है। लेकिन घटनास्थल और प्रत्यक्षदर्शियों का जो कहना है उसके अनुसार घटना को पूरी रणनीति के तहत अंजाम दिया गया है, अपराधी पिस्टल और कट्टा दोनों तरह के हथियार का इस्तेमाल किया है।

घायल 11 में जिस एक की मौत हुई है उसे भी कट्टा से ही मारा है और जिन तीन लोगों की स्थिति गंभीर है। उन सभी को भी कट्टा से ही मारा है मतलब अपराधी गोली लोड करता था। फिर फायर करता था इसके अलावे दहशत फैलाने के लिए पिस्टल का इस्तेमाल किया है ये किसी सिरफिरे का काम नहीं हो सकता है। क्योंकि गोली चलाने वाला अपनी पहचान छुपाने के लिए गमछा का इस्तेमाल किया है और गाड़ी चलाने वाला हेलमेट पहने हुए हैं। वही जिस गाड़ी का इस्तेमाल किया है उस पर नम्बर प्लेट सही नहीं है। मतलब जिसने भी इस घटना को अंजाम दिया है वो दिमाग से काम लिया है ,साथ जिस तरीके से फायरिंग करते हुए 50 किलोमीटर तक एनएच पर चलता रहा ये किसी साधारण अपराधी का काम हो ही नहीं सकता है। ये समझते हुए कि एनएच पर चार थाना और दो ओपी है फिर भी इस तरह दिन दहाड़े गोली चलाना बड़े बड़े अपराधियों के बूते के बाहर है। क्योंकि पुलिस सोयी नहीं रहती तो आमने सामने तय था ।

वैसे पुलिस के आपराधिक रिकॉर्ड पर गौर करे तो इस तरह के अपराधियों में मोहद्दीनगर का वो तीन भाई है जो बैंक लूट मामले में कई वर्षों से जेल में था। जो हाल ही में बाढ़ हाजत से फरार हो गया है, समस्तीपुर ,पटना ,वैशाली और बेगूसराय पुलिस रात से ही इसके ठिकाने पर लगातार छापेमारी कर रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आज मीडिया ,बीजेपी के नेता और सोशल मीडिया पर जंगल राज के वापसी की बात कर रहे हैं वो सरकार में रहते सजग रहते तो ये स्थिति नहीं बनती। बेगूसराय का अपराधिक इतिहास उठा ले 2005 से 2022 के बीच 100 से 125 के बीच हर वर्ष हत्याएं होती रही है।

लालू प्रसाद के शासन काल में भी कभी भी बेगूसराय में कमजोर एसपी नहीं रहा लेकिन इस सरकार में विनय कुमार के बाद बेगूसराय जिले को कोई भी मजबूत एसपी मिला ही नहीं। भगवान का शुक्र कहिए जो बेगूसराय के अपराधियों का मति मार गया था नहीं तो क्या क्या होता सोच नहीं सकते है।

आज बीजेपी सड़क पर है सवाल इनसे भी है 2005 में बिहार की जनता एनडीए पर भरोसा इसलिए जताया था कि बिहार अपराध मुक्त होनी चाहिए। आंकड़ों पर गौर कीजिएगा तो हैरान रह जायेंगे। अपहरण भले ही रुक गया लेकिन व्यापारियों की हत्या और रंगदारी जैसी घटनाओं में कोई कमी नहीं आयी।

वही पुलिस अपराध और अपराधियों पर काम करने के बजाय दूसरे काम में लगी रहती है। बिहार पुलिस की स्थिति यह है कि कोई बड़ी आपराधिक घटना हो जाये तो ये सारे पहले अपने आपको सुरक्षित करेंगे। तब कही अपराधियों के खोज में निकलेंगे। बहुत ही बूरा हाल है कह सकते हैं कि बिहार अपराधियों रहमो करम पर है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

(लेखक संतोष सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं। इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। इसमें शामिल तथ्य तथा विचार/विश्लेषण ‘N7India.com’ के नहीं हैं और ‘N7India.com’ इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)

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