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Aristo फार्मा के मालिक किंग महेंद्र प्रसाद देश के सबसे अमीर राज्यसभा सदस्य थे!

मुंबई में वे पहले एक छोटी दवा कंपनी में साझेदार बने और फिर महज 31 वर्ष की उम्र में 1971 में एरिस्टो फार्मा नाम से खुद की दवा कंपनी बना ली। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

Patna: चार हजार करोड़ रुपये के मालिक देश के सबसे अमीर राज्यसभा सदस्य और फार्मा दिग्गज महेंद्र प्रसाद का निधन रविवार रात दिल्ली में हो गया। वे काफी अरसे से बीमार चल रहे थे।

महेंद्र प्रसाद का जन्म बिहार में जहानाबाद जिले के गोविन्दपुर गांव में वर्ष 1940 को हुआ था। महेंद्र प्रसाद के पिता वासुदेव सिंह साधारण किसान थे। हालांकि उन्होंने अपने बेटे महेंद्र को पटना कॉलेज से इकोनॉमिक्स में बीए करवाया। महेंद्र बेरोजगार थे, परेशान थे। साल 1964 में एक साधु ने पुड़िया में कुछ दिया और कहा कि पूरा परिवार इसे खा ले, दिन बदल जाएंगे लेकिन ऐसा करने से परिवार में दो लोगों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद वे गांव छोड़कर मुंबई चले गए। वहां से जब 16 साल बाद लौटे तो वे महेंद्र से किंग महेंद्र बन चुके थे।

मुंबई में वे पहले एक छोटी दवा कंपनी में साझेदार बने और फिर महज 31 वर्ष की उम्र में 1971 में एरिस्टो फार्मा नाम से खुद की दवा कंपनी बना ली। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। बताया जाता है कि अपनी कंपनी में उन्होंने जहानाबाद के 2000 से ज्यादा लोगों को नौकरी दी। वे कभी नौकरी नहीं करना चाहते थे। उनके बचपन के मित्र राजाराम शर्मा ने एक अखबार को दिए गए साक्षात्कार में बताया था कि शिक्षक की नौकरी के ऑफर पर महेंद्र का कहना था- मर जाऊंगा, पर नौकरी नहीं करूंगा।

किंग महेंद्र 1985 से ही लगातार राज्यसभा सदस्य रहे हैं। पार्टी चाहे कोई भी रही हो, वह कभी राज्यसभा का चुनाव नहीं हारे। महेंद्र प्रसाद की मालिकाना संपत्ति करीब 4 हजार करोड़ की बताई जाती है। तभी तो उन्हें किंग महेंद्र के नाम से जाना जाता था। हालांकि वे जन्मजात रईस नहीं थे यानी उन्हें रईसी विरासत में नहीं मिली थी। राज्यसभा सदस्य से पहले 1980 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर पहली बार आम चुनाव लड़ा था और जहानाबाद से लोकसभा सदस्य चुने गए थे।

हालांकि 1984 का लोकसभा चुनाव वे हार गए लेकिन राजीव गांधी के करीबी होने का उन्हें लाभ मिला और वे राज्यसभा भेज दिए गए। उसके बाद तो पार्टी कोई भी हो, वे चुनाव नहीं हारे। बाद में वे जदयू से जुड़ गए और नीतीश के खास बन गए। साल 2012 में जदयू की तरफ से राज्यसभा के लिए चुने जाने पर उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर राज्यसभा में एक ही सीट खाली होती तो भी मैं ही चुना जाता।

उल्लेखनीय है कि एरिस्टो फार्मास्युटिकल्स के अलावा उनकी अन्य कंपनियों में मैप्रा लेबोरेटरीज और इंडेमी हेल्थ स्पेशलिटीज शामिल हैं। सभी का मुख्यालय मुंबई में है। वियतनाम, श्रीलंका, म्यांमार और बांग्लादेश समेत कई देशों में उनकी कंपनी के कार्यालय हैं। अप्रैल 2002 और अप्रैल 2003 के बीच किंग महेंद्र ने 84 देशों की यात्रा की।

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