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अजब बिहार की गजब कहानी, “मयखानों पर नहीं सिर्फ मयकशों पर है खाकी की नज़र”-विपक्ष

बिहार में शराबबंदी कानून लागू कर नीतीश कुमार लगातार विपक्ष के शब्दभेदी तीर से जख्मी होते नजर आ रहे हैं।

Patna: बिहार में शराबबंदी कानून लागू कर नीतीश कुमार लगातार विपक्ष के शब्दभेदी तीर से जख्मी होते नजर आ रहे हैं। शराबबंदी वाले नीतीश कुमार के बिहार में पिछले चार दिनों के दौरान बढ़े मौत के आंकड़े ने उन्हें विपक्ष के निशाने पर ला खड़ा किया है। और इस बार विपक्ष ये मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहती।

गौरतलब है कि बीते चार दिनों के भीतर बिहार में शराब से हुई मौतों के आंकड़ों में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। लगातार आ रहे रिपोर्ट्स के मुताबिक अबतक 41 लोग नशे का शिकार हो चुके हैं, विपक्ष का आरोप है कि आंकड़ों में और भी बढ़ोत्तरी हो सकती है। हालाँकि विरोधी दल द्वारा जिस आंकड़े का दावा किया जा रहा है अभी उसकी सच्चाई सामने आनी बाकी है।

बेतिया-गोपालगंज और समस्तीपुर में हुई मौतें !

बिहार में दीपावली से लेकर गोवर्धन पूजा के दौरान गोपालगंज-बेतिया और समस्तीपुर जिले में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों ने जहां प्रदेश की नीतीश सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया है। वहीं विपक्ष को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा भी थमा दिया है। बीते चार दिन में बेतिया-गोपालगंज और समस्तीपुर में कुल 41 लोगों की मौत हो चुकी है।

शराबबंदी पर बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री जब बड़े-बड़े प्रवचन दे रहे थे तब उनके बगल में खड़े भाजपा के मंत्री के स्कूल के अंदर से दो ट्रक शराब बरामद हुई थी। पुलिस एफआईआर में इसका ज़िक्र भी है। मंत्री के नामजद भाई को आज तक बिहार पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी है। यह इनकी कथित शराबबंदी की सच्चाई है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राज्यसभा सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री ड़ॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि पांच साल होने पर भी नीतीश सरकार ना ही सही तरीके से शराबबंदी कानून को लागू कर पायी है और ना ही अवैध शराब बनाने वालों पर नकेल कस पायी है। प्रदेश में डबल इंजन (जदयू-भाजपा) की कुशासन सरकार का ही परिणाम है कि जहरीली शराब पीने से बीते चार दिनों में करीब 50 लोगों की जान गई है।

राजद के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र यादव ने कहा कि शराबबंदी पर बड़बड़ करने वालों के राज में विगत तीन दिनों में ही जहरीली शराब से 50 से अधिक मौतें हो चुकी है लेकिन कुशासन सरकार के कान के नीचे जूं तक नहीं रेंग रही है। मुख्यमंत्री स्वयं, प्रशासन, माफिया और तस्कर पुलिस पर कार्रवाई की बजाय पीने वालों को कड़ा सबक सिखाने की धमकी देते रहते है।

पटना के वरिष्ठ अधिवक्ता छाया मिश्र ने कहा कि नीतीश सरकार ने शराबबंदी का बढ़िया कानून बनाया है लेकिन कहीं न कहीं प्रशासनिक स्तर पर चूक का ही परिणाम है कि प्रदेश में बीते चार दिनों के भीतर करीब कई लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा है। सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश सिंह ने बताया कि नेपाल और उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे होने के कारण प्रदेश के गोपालगंज और बेतिया में आसानी से शराब उपलब्ध हो रहा है। प्रशासन को इस पर नजर रखनी चाहिए। कोविड-19 स्पेशलिस्ट डॉक्टर अजय कुमार ने बताया कि प्रशासन की चूक का ही परिणाम है कि प्रदेश में गत तीन चार दिनों में इतने लोगों की मौत हुई है।

10 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

बिहार में एक के बाद एक जहरीली शराब से मौत मामले में अबतक 10 पुलिसकर्मियों पर गाज गिर चुकी है। इन 10 पुलिसकर्मियों में से तीन थानेदार शामिल हैं। इन मामलों में कुल 18 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। बिहार पुलिस मुख्यालय ने इससे जुड़ी आधिकारिक जानकारी साझा की है।

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